कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का 21 अक्तूबर को समापन हो गया है। लंका दहन के उपरांत अधिकतर देवी-देवता अपने देवालयों की ओर वीरवार को ही रवाना हो गए। कुछ देवी-देवताओं ने शुक्रवार को मंदिरों की ओर प्रस्थान किया है। लेकिन इस बीच अठारह करड़ू की सौह में भाई-बहन का प्रेमभाव देखने को मिला।
दशहरा उत्सव में पहली बार शिमला के डोडरा क्वार से पहुंची माता चामुंडा और कुल्लू स्थित माली पत्थर के देवता शैला और मां चामुंडा ने भाई-बहन के रिश्ते को निभाया। डोडरा क्वार की माता चामुंडा वापस अपने देवालय की ओर प्रस्थान कर रही थी। लेकिन देवता शैला ब्रह्मा और माता चामुंडा ने उन्हें जाने से रोका है। इसके बाद माता भी उनके साथ माली पत्थर के लिए रवाना हुई।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव देवी-देवताओं के मिलन के लिए विख्यात है। इसमें मनुष्य ही नहीं, देवी-देवता भी रीति-रिवाजों को निभाते हैं। यही नजारा शुक्रवार देर शाम ढालपुर में देखने को मिला। देवता शैला ब्रह्मा ने डोडरा क्वार की माता को वापस जाने से रोका। देवता ने गूर के माध्यम से कहा कि वह उनकी बहन है। भाई का फर्ज निभाते हुए वह माता को अपने मंदिर ले जाना चाहते हैं। लेकिन साथ आए हारियान माता को वापस ले जाना चाहते थे। सहमति बनने के लिए करीब आधा घंटे का समय लगा। इसके बाद डोडरा क्वार की माता चामुंडा माली पत्थर के देवता शैला ब्रह्मा और माता चामुंडा के साथ उनके देवालय की ओर चल पड़ी। कारदार रणसिंह ने कहा कि देवता ने गूर के माध्यम से बताया कि दोनों चामुंडा बहनें आपस में दुख-सुख करना चाहती हैं। इसके लिए माता को वह अपने देवालय ले जा रहे हैं।