कुल्लू के सेऊबाग में जबाड़ी मेले में नाटी डालते ग्रामीण।-संवाद
चैत्र संक्रांति से कुल्लू में शुरू हुए बिरशू मेले
अरछंडी सहित कई गांवों बिरशू मेले की धूम
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। चैत्र संक्रांति से कुल्लू में बिरशू मेलों का आगाज हो गया है। बिरशू मेले में देवी-देवताओं ने देव परंपरा का निर्वहन किया। कुल्लू के देवता वीरनाथ गौहरी तीन माह के बाद स्वर्ग प्रवास से लौट आए हैं।
शनिवार को चैत्र संक्रांति पर मंदिर में पूजा-पाठ किया गया और लोगों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद दिया। परंपरा के अनुसार देवता ने अपने गूर के माध्यम से भविष्यवाणी करते हुए अग्नि, बाढ़ और ओलावृष्टि की चेतावनी दी है। देवता के कारदार राज कुमार महंत ने कहा कि देवता स्वर्ग प्रवास से लौट आए हैं।
ऊझी घाटी के तहत अरछंडी गांव में बिरशू मेले की धूम रही। माता काली ओड़ी के सम्मान में देव परंपरा का निर्वहन किया गया। पार्वती घाटी के तहत तलपीणी में जेठा बिरशू हुआ। महिलाओं ने कुल्लवी परिधानों में सजकर फूल देने की परंपरा निभाई। अन्य गांवों में चैत्र संक्रांति पर कई देवरथ देवालयों से बाहर निकले। देवताओं की ढोल-नगाड़ों की थाप पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। कुल्लू घाटी में बिरशू मेलों का दौर अप्रैल तक जारी रहेगा। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि मेलों में देव परंपराओं का निर्वहन भी किया गया है।