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Kullu News: सेब और जापानी फल के पौधे रोपने में जुटे बागवान

Wed, 04 Feb 2026 10:40 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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ऊझी घाटी में जोर-शोर से चल रहा नई प्रजातियाें के पौधे रोपने का काम
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मार्च तक लगाए जाएंगे नए पौधे, गड्ढे खोदने, खाद डालने में भी बागवान व्यस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
पतलीकूहल (कुल्लू)। ऊझी घाटी में सेब और जापानी फल सहित अन्य फलों के पौधे लगाने का कार्य जोरों पर चल रहा है। घाटी के गांवों में इन दिनों बागवान बगीचों में गड्ढे खोदने, खाद डालने और नए पौधों का रोपण करने में व्यस्त नजर आ रहे हैं।
नर्सरी में पौधों की खरीद को बागवानों को देखा जा सकता है। क्षेत्र में सेब की नई पौध लगाने का यह सिलसिला मार्च तक जारी रहेगा। स्थानीय बागवानों में इस बार खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। कटराईं, नग्गर, शिरढ़, हलाण, बड़ाग्रां, फोजल और जगतसुख सहित आसपास के इलाकों के बागवानों ने बताया कि वे पारंपरिक रॉयल सेब के साथ नई और उन्नत किस्मों की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं।
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बागवान राजेश ठाकुर शर्मा, दीनानाथ शर्मा, हरीश वर्मा, मोहन लाल, राकेश ठाकुर, राजीव ठाकुर, लोतरा और अमन शर्मा ने बताया कि बदलते मौसम और बाजार की मांग को देखते हुए बागवानी में बदलाव जरूरी हो गया है। उनके अनुसार, अब केवल रॉयल सेब पर निर्भर रहना लाभकारी नहीं है। इसी कारण वे ऐसी अर्ली वैरायटी के सेब के पौधे लगा रहे हैं। ये रोपण के दो से तीन वर्ष के भीतर ही फसल देना शुरू कर देते हैं। इससे बागवानों को जल्दी आमदनी मिलने की उम्मीद रहती है। इन नई किस्मों में गाला, जेरोमाइन, रेड चीफ, स्काॅरलेट स्पर, गोल्डन डिलीशियस, ग्रैनी स्मिथ और फूजी जैसी वेराइटीज को प्राथमिकता दी जा रही है।
ऊझी घाटी में इस बार जापानी फलों के पौधों की भी बड़े पैमाने पर रोपाई की जा रही है। बागवानों ने कहा कि जापानी फल, नाशपाती (एशियन पियर) और अन्य आयातित किस्में कम समय में तैयार होती हैं। बाजार में इनकी अच्छी मांग रहती है। कुल मिलाकर ऊझी घाटी में बागवानी का स्वरूप धीरे-धीरे बदल रहा है। पारंपरिक सेब के साथ नई किस्म और जापानी फलों की ओर बढ़ता रुझान आने वाले वर्षों में घाटी की आर्थिकी को और मजबूत करने की उम्मीद जगा रहा है।
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उधर, उद्यान विभाग के उप निदेशक राज कुमार ने बताया कि बागवान केवल विभाग के पास पंजीकृत नर्सरी से ही पौधों की खरीद करें। कुल्लू फलोत्पादक मंडल अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने बताया कि बागवानी से जुड़ी समस्याओं के निदान को बागवान उनसे संपर्क कर सकते हैं।
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