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Kullu News: चार पीढ़ियां, एक ताल, मनाली में नारी शक्ति ने डाली महानाटी

Wed, 21 Jan 2026 10:42 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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मनाली विंटर कार्निवल के दूसरे दिन महानाटी के दौरान भाग लेती महिलाएं. संवाद
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महिलाओं के कदम से कदम मिले तो झूम उठा पर्यटन नगरी मनाली का मालरोड
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मनाली में घंटों तक इंतजार करने के बाद हुई 45 मिनट की महानाटी
संजय भारद्वाज
मनाली। मालरोड मनाली पर सोमवार को ऐसा दृश्य उभरा जिसने न सिर्फ पर्यटकों को चौंकाया, बल्कि हिमाचली संस्कृति की जड़ों को भी मजबूती दी। दादी, बहू, पोती और परपोती, चार पीढ़ियों की महिलाओं ने जब एक साथ महानाटी डाली तो इतिहास बन गया।
काले रंग का तीन फूल वाला पट्टू, लाल धाठू, सोने-चांदी के गहनों से सुसज्जित महिलाओं ने हाथ में सफेद रुमाल लेकर नाटी डाली। विंटर कार्निवल के दूसरे दिन महानाटी में एक साथ चार पीढ़ियों ने हिमाचली संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया। महिला सशक्तीकरण की मिसाल भी पेश की। 18 से 80 वर्ष तक की चार पीढ़ियों के कदम से कदम मिले तो पर्यटक और स्थानीय लोग भी झूम उठे।
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महानाटी को लेकर महिलाओं में काफी उत्सुकता दिखी। सुबह 9 बजे ही महिलाओं का मालरोड में पहुंचना शुरू हो गया था। 34 से 40 किलोमीटर दूर गांवों से महिलाएं पहुंचीं। घंटों इंतजार करने के बाद 12:02 बजे महानाटी शुरू हुई। यह 12:47 पर खत्म हुई। लगभग 45 मिनट चली नाटी में महिलाओं ने खूब जोश दिखाया। नाटी की अगुवाई 18 से 20 वर्ष की युवतियों ने की। न उम्र की सीमा, न क्षेत्र का बंधन और न ही कोई भेदभाव। एक साथ महिलाएं कदम से कदम मिलाकर थिरकीं।

70 साल की देवकला ने भी लिया हिस्सा
70 साल की देवकला ने भी महानाटी में भागीदारी सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि महानाटी शानदार रही। कुल्लू की संस्कृति को जीवंत रखने और नई पीढ़ी को इसमें ढालने का भी अवसर मिला। 18 साल की लता देवी ने कहा कि बुजुर्ग महिलाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर नाटी डालना गर्व की बात है। एसडीएम कुमार शर्मा ने बताया कि महानाटी विंटर कार्निवल का अभिन्न कार्यक्रम है। महानाटी में 18 से 80 वर्ष तक की महिलाओं ने भाग लिया।
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अंतिम पंक्ति तक नहीं पहुंची गायकों की आवाज
महानाटी के दौरान महिलाओं की संख्या पहली बार इतनी अधिक देखने को मिली। रामबाग से दुर्गा मंदिर तक महिलाओं की दो लाइनें लग गईं। ऐसे में रामबाग के समीप गीत गा रहे कलाकारों की आवाज दुर्गा मंदिर के समीप नहीं पहुंच पाई। कुछ देर तक अंतिम पंक्ति में महिलाओं के कदम से कदम नहीं मिल पाए। हालांकि, बाद में आयोजकों ने मंदिर के समीप एक स्पीकर लगाकर स्थिति को संभाला।
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