फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पत्थर के बर्तनों में पांच घंटे तक गर्म रहता है खाना

विज्ञापन
स्पीति में पत्‍थर के बर्तन में बनाए खाने की भी लगाई प्रदर्शनी।
विज्ञापन
केलांग/उदयपुर/रोहतांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में लोकोत्सव स्नो फेस्टिवल नए-नए पड़ाव पर पहुंच रहा है। इसके माध्यम से जनजातीय क्षेत्र के लोगों के रहन-सहन के बारे में भी पता चल रहा है। इसी कड़ी में स्पीति के खुरिक गांव में सोमवार को स्नो फेस्टिवल मनाया। इसमें पत्थर से बने पारंपरिक बर्तनों की प्रदर्शनी लगाई गई।
विज्ञापन

खास बात यह है कि इन बर्तनों का इस्तेमाल आज भी किया जा रहा है। पत्थर से बने बर्तनों ने लोगों का मन मोहा। आधुनिक सुविधाओं के अभाव में पहले जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में लोग पत्थर के पारंपरिक बर्तनों में रोजाना खाना पकाते थे। हालांकि घाटी के अधिकतर दुर्गम क्षेत्रों में अभी भी पत्थर के बर्तनों में ही दाल, चावल और थुक्पा पकाया जाता है। इन बर्तनों में माइनस तापमान में भी पांच से छह घंटों तक खाना गर्म रहता है। इसके अलावा पारंपरिक स्थानीय व्यंजनों की महक ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। ग्राम पंचायत खुरिक के गांव खुरिक में आयोजित स्नो फेस्टिवल में एसडीएम जीवन सिंह नेगी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। मुख्यातिथि ने कार्यक्रम की शुरूआत की। स्थानीय कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। मुख्यातिथि जीवन सिंह नेगी ने कहा कि स्नो फेस्टिवल के माध्यम से पारंपरिक पद्धति को संरक्षित रखना प्रशासन का लक्ष्य है। स्नो फेस्टिवल का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति को पर्यटन से जोड़ना है। कलाकारों को बेहतर प्रस्तुति पेश करने पर सम्मानित किया गया। इस दौरान नायब तहसीलदार विद्या सिंह नेगी, स्नो फेस्टिवल कमेटी सदस्य प्रेम चंद, नवांग, मुनसेलिंग स्कूल प्रधानाचार्य छेरिंग बौद्ध आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें