प्लम, आड़ू और खुमानी के पौधों पर समय पर फ्लावरिंग होने से बागवान खुश
तापमान में बढ़ोतरी होने के साथ फ्लावरिंग की प्रक्रिया भी तेज होने की संभावना
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। सर्दियों की सफेद चादर ओढ़े पहाड़ अब रंगों में रंगने लगे हैं। कुल्लू की वादियों में प्लम, आड़ू और खुमानी के पौधों पर खिले कोमल फूल इस बात का संकेत दे रहे हैं कि इस बार बागवानों की मेहनत रंग ला सकती है। समय पर हुई फ्लावरिंग ने बेहतर पैदावार की उम्मीदों को नई उड़ान दी है।
फरवरी के तीसरे सप्ताह में प्लम, आडू और खुमानी के पौधों में फ्लावरिंग शुरू हो गई है। निचले क्षेत्रों में गुठलीदार फलों के पौधों में फूल खिल गए हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यह प्रक्रिया एक सप्ताह बाद शुरू होगी। हालांकि पहले सूखे जैसे हालात के बीच अर्ली फ्लावरिंग की संभावना जताई जा रही थी लेकिन अब समय पर फूल खिलने से बागवानों को बेहतर फसल की उम्मीद है।
निचले क्षेत्रों में शुरुआती दौर में अर्ली वैरायटी के पौधों में फूल खिल गए हैं। दिन के समय काफी तेज महसूस की जा रही है जबकि सुबह और शाम के समय मौसम ठंडा है। तापमान में वृद्धि होने के साथ फ्लावरिंग की प्रक्रिया आने वाले दिनों में और तेज होगी। मार्च के पहले सप्ताह में गुठलीदार पौधों में फ्लावरिंग चरम पर होने की उम्मीद है। फिलहाल मौसम इन दिनों बागवानों के अनुकूल है। बागवान गोपाल सिंह, सेस राम, नेसू राम और प्रेम चंद ने कहा कि फ्लावरिंग के दौरान अधिक बारिश और ओलावृष्टि कई बार बागवानों की मेहनत पर पानी फेर देती है। फ्लावरिंग के दौरान मौसम अधिकतर साफ रहना चाहिए जिससे प्लम की सेटिंग बेहतर होगी।
बारिश-बर्फबारी से मिली संजीवनी
बागवानों ने कहा कि जनवरी-फरवरी में हुई बर्फबारी से सेब, प्लम, नाशपाती और अन्य फलदार पौधों को संजीवनी मिली है। फलोत्पादक मंडल कुल्लू के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि अच्छी फसल होगी तो बागवानों को इसका लाभ मिलेगा।
ऊंचाई वाले इलाकों में होगी फ्लावरिंग
डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के सहनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ठाकुर ने 15 फरवरी के बाद फ्लावरिंग शुरू हो जाती है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी फ्लावरिंग होनी है।