ब्यास नदी में फिर बाढ़ आ गई है। सोमवार सुबह तड़के नदी का जलस्तर बढ़ने से मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग-तीन पर पलचान से मनाली तक जगह-जगह भूस्खलन हुआ। हालांकि इससे यातायात पर कोई असर नहीं हुआ। बाहंग और वशिष्ठ बिहाल में कई मकान और दुकानें खतरे की जद में आ गई हैं। प्रशासन ने ऐसे 30 मकानों और दुकानों को खाली करवा दिया है। अचानक बाढ़ के बाद इन इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। वशिष्ठ और चचोगा का पंचायत भवन भी खतरे में आ गया है।
उपमंडलाधिकारी मनाली डॉ. सुरेंद्र ठाकुर ने बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा किया। उन्होंने बीआरओ को जल्द से जल्द सड़क को ठीक करने को कहा है। रविवार रात से ही घाटी में बारिश का क्रम जारी है। तड़के हुई मूसलाधार बारिश से सेरी नाला, पागलनाला, ब्यास कुंड नाला और अन्य नदी-नाले उफान पर आ गए। इससे ब्यास नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया। बाहंग के पास नदी का रुख मुड़ने से पानी सड़क की ओर आ गया। पलचान के पास सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया है। वशिष्ठ बिहाल में भी दो-तीन स्थानों पर भूस्खलन हुआ। वशिष्ठ चौक के पास सड़क धंस गई है। हालांकि इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही जारी रही।
प्रशासन ने धंसी सड़क को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया है। सुबह तड़के बाढ़ के कारण बाहंग और वशिष्ठ बिहाल में कई मकान खतरे की जद में आ गए हैं। बताया जा रहा है कि नदी का रौद्र रूप धारण करने के बाद इलाके के लोग सुरक्षित स्थानों की ओर गए। उधर प्रशासन ने खतरे की जद में आए मकान और दुकानें खाली करवाने के आदेश दिए हैं। मनाली प्रशासन ने इलाके में अलर्ट जारी किया है। एसडीएम मनाली डॉ. सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि मनाली-लेह मार्ग पर करोड़ों का नुकसान हुआ है। जगह-जगह सड़क धंस गई है। पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग के हेलिपैड को भी काफी नुकसान हुआ है। हेलीपैड को जाने वाली सड़क भी बह गई है। नदी का जल स्तर कम होने का इंतजार है। फिर भी पत्थर आदि फेंककर सुरक्षा के उपाय किए जा रहे हैं।