साल बाद फिर से भगवान रघुनाथ की नगरी ढालपुर तपोवन में तबदील हो गई है। देर शाम को ढोल-नगाड़ों, नरसिंगों, करनाल और शहनाई की स्वरलहरियों से गूंज उठी। देर शाम तक जिला भर से आए देवी देवताओं का क्रम जारी रहा। वहीं सोमवार सुबह से ही देवी देवताओं के देवलुओं, कारकून और हरियान देवताओं के ठहराव के वाली जगहों पर अस्थायी शिविरों को सजाने में मशगूल रहे। ढालपुर में आनी-निरमंड, बंजार, सैंज, गड़सा, मणिकर्ण तथा ऊझी घाटी के करीब 150 से 170 देवी देवता अपने-अपने अस्थायी शिविरों में विराजमान हो गए। देवी देवता के दशहरा में पंहुचने पर हर कोई अपना शीश देवरथों के आगे झुका कर अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
देवी देवताओं के विश्व विख्यात के इस महाकुंभ में आए आए देशभर से आए सैकड़ों कारोबारियों भी अपने हाट-बाट को सजाने में व्यस्त रहे। डोम लगाने के साथ-साथ झूला व अन्य कई स्टालों को सजाने का क्रम दिन रात चला हुआ है। उधर, दशहरा उत्सव के सफल आयोजन को लेकर दशहरा उत्सव समिति दिन भी व्यस्त रही और सुबह से शाम तक पांच से छह बैठकें आयोजित कीं। इस दौरान भगवान रघुनाथ की ऐतिहासिक एवं भव्य रथयात्रा से लेकर मुख्यातिथि के स्वागत, देवी देवताओं के आगमन तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। दशहरा उत्सव समिति के उपाध्यक्ष एवं उपायुक्त कुल्लू युनूस ने कहा कि तमाम तैयारियों को पूरा कर दिया है।