पुरातन गांव मलाणा में देवता जमलू के सम्मान में फागली उत्सव धूमधाम से मनाया गया। उत्सव में देवता के भक्तों ने मन्नतें पूरी होने पर सोने-चांदी के घोड़े भेंट स्वरूप चढ़ाए। वहीं मलाणा गांव की महिलाओं ने माता अंबिका के प्रांगण में पारंपरिक नृत्य भी किया।
हालांकि कुल्लू जिला की परंपरा में काफी बदलाव आया हो, लेकिन विश्व विख्यात पुरातन गांव मलाणा में अभी तक देव परंपरा का निर्वहन पारंपरिक तरीके से किया जाता है। अभी तक गांव की महिलाएं पुराना पहनावा पहनकर देव नृत्य करती हैं। शुक्रवार को गांव की महिलाओं ने एकत्रित होकर देवता जमलू ऋषि से इजाजत मांगने के बाद माता रेणुका के मंदिर प्रांगण में जाकर देव नृत्य किया।
मलाणा पहुंचकर ऊझी मनाली से लेकर जिला अन्य कई जगहों से श्रद्धालुओं ने माथा टेका। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने मन्नतें पूरी होने पर देवता जमूल को सोने-चांदी के घोड़े भी भेंट किए। देवता के दर्शन के लिए दिनभर काफी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी रही।
कारकून बुधराम और भागी राम का कहना है कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी फागली उत्सव को पुरातन परंपरा अनुसार मनाया गया। इस बार काफी संख्या में श्रद्धालु देवता के दर पहुंचे। करीब पांच दिनों तक फागली उत्सव को मनाया जाता है। गांव की महिलाओं ने गेहूं और सलियारा के भूने हुए दानों को खाते-खाते नृत्य किया। यह नृत्य फागली उत्सव का मुख्य आकर्षण का केंद्र है।