कुल्लू के शाढ़ाबाई में आर्ट ऑफ लिविग के शिविर के समापन अवसर पर।-संस्था।
कुल्लू। देवभूमि कुल्लू की शांत वादियों में चार दिन तक ध्यान, मौन और आत्मचिंतन की साधना चली। आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से शाढ़ाबाई मोनेस्ट्री भुंतर में आयोजित चार दिवसीय एडवांस मेडिटेशन प्रोग्राम में करीब 70 साधकों ने भाग लिया। इस दौरान साधकों ने रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से कुछ समय अलग निकालकर ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से आंतरिक शांति का अनुभव किया।
बंगलूरू आश्रम से पहुंचे स्वामी गुणातीत ने शिविर में मुख्य शिक्षक के रूप में साधकों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने प्रतिभागियों को ध्यान, मौन, साधना और आत्मचिंतन की विभिन्न प्रक्रियाओं का अभ्यास करवाया। चार दिन तक मोनेस्ट्री का वातावरण ध्यान और साधना से सराबोर रहा। हिमालय की शांत फिजाओं के बीच साधकों ने मौन रहकर अपने मन और विचारों को समझने का प्रयास किया।
आर्ट ऑफ लिविंग की डिस्ट्रिक्ट टीचर कोऑर्डिनेटर सोनाली कपूर ने बताया कि शिविर में कुल्लू और आसपास के क्षेत्रों के साथ प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से भी साधक पहुंचे। उन्होंने कहा कि आज की व्यस्त जीवनशैली में लोगों को कुछ समय स्वयं के लिए निकालना जरूरी है। ध्यान और आत्मचिंतन मन को शांत करने में सहायक हो सकते हैं।
आर्ट ऑफ लिविंग के मीडिया प्रभारी सुशांत शर्मा ने बताया कि भविष्य में भी देवभूमि कुल्लू में इस तरह के ध्यान, मौन और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शिविर के समापन पर साधक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मचिंतन के अनुभव साथ लेकर लौटे।