यांगला में बर्फ की सफेद चादर पर मस्ती करते पर्यटक। -स्रोत : जागरूक पाठक
सिस्सू (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय क्षेत्र लाहौल की चंद्रा घाटी के वामतट पर स्थित यांगला गांव अपनी खूबसूरती के लिए किसी परिचय का मोहताज नहीं है। अटल टनल खुलने के बाद यह सर्दियों में स्नो प्वाइंट बन गया है, जिसे अब ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से भी पहचाना जा रहा है।
बर्फ से ढके इस पर्यटन स्थल ने युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। खेतीबाड़ी का काम खत्म होने के बाद यहां के युवा अब साहसिक गतिविधियों से आजीविका कमा रहे हैं। अटल टनल रोहतांग से हर दिन सैलानियों का सैलाब यांगला की बर्फीली वादियों में मस्ती करने पहुंच रहा है।
लगभग 26 किलोमीटर दूर स्थित यह स्नो प्वाइंट अपनी खूबसूरती से पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। पिछले तीन वर्षों से यहां हर साल लाखों सैलानी पहुंच रहे हैं और साहसिक खेलों का लुत्फ उठा रहे हैं।
यांगला स्नो प्वाइंट की खासियत यह है कि बर्फ की सफेद चादर के बीच दियार और कायल के हरे-भरे जंगल इसकी सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। इस समय यह प्वाइंट अन्य स्थानों की तुलना में अधिक बर्फ के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
गोंधला पंचायत के पूर्व प्रधान प्रेमलाल ने कहा कि इस साल घाटी में बर्फबारी कम हुई है, लेकिन यांगला में दिसंबर-जनवरी के दौरान दो महीने तक धूप नहीं निकलती और तापमान शून्य से 20 डिग्री नीचे चला जाता है। इससे यहां बर्फ की मोटी चादर लंबे समय तक बनी रहती है।
यांगला में बर्फ की सफेद चादर पर मस्ती करते पर्यटक। -स्रोत : जागरूक पाठक