भगवान रघुनाथ के बाद जिले भर के देवी-देवताओं के तंबू बनाने का काम शुरू
कुल्लू के दूरदराज दलाकों से देवी-देवताओं ने किया दशहरा उत्सव के लिए कूच
सात दिनों तक ढालपुर मैदान में विराजमान होंगे जिले भर के देवी देवता
गौरीशंकर
कुल्लू। ढालपुर मैदान एक बार फिर श्रद्धा की चादर ओढ़ने लगा है। दशहरा की पूर्व संध्या पर जहां पहले सिर्फ मिट्टी थी, वहां अब तिरपालों के नीचे देवताओं के अस्थायी धाम बसते जा रहे हैं।
एक-एक कर जिले के देवी-देवताओं के शिविर भी आकार लेने लगे हैं। हर तंबू केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि अगले सात दिनों के लिए एक देवालय होगा। यहां मंत्रों की गूंज, धूप की महक और आस्था की ऊर्जा एक साथ बहती नजर आएगी।
भगवान रघुनाथ का अस्थायी शिविर पांच दिन से सजाया जा रहा है। सोमवार से अन्य देवी-देवताओं के अस्थायी शिविर भी सजाने शुरू कर दिए हैं। देव समाज के लोगों ने अपने-अपने देवी-देवताओं के स्थलों में तंबू लगाने शुरू कर दिए हैं। उत्सव के लिए दो दिन शेष हैं। इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। जिले के दूरदराज क्षेत्रों से देवी-देवताओं ने दशहरा के लिए कूच कर लिया है। सोमवार को सराज, सैंज क्षेत्र के देवी-देवताओं के तंबू स्थापित करने का काम शुरू हो गया। देवी-देवताओं के कारकूनों ने सुबह ही ढालपुर मैदान के देव स्थलों में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद तंबू लगाने का काम शुरू हुआ। पुराने भारतीय स्टेट बैंक कार्यालय के सामने वाले मैदान, उपायुक्त के अलावा एसपी कार्यालय के साथ भी अस्थायी शिविर बनाने का कार्य चल रहा है। दो दिन बाद अस्थायी शिविरों में सात दिन के लिए देवी-देवता विराजमान होंगे।
तीन सौ से अधिक देवी-देवता होंगे विराजमान
अंतरराष्ट्रीय दशहरा के लिए उत्सव समिति ने 332 देवी-देवताओं को निमंत्रण पत्र भेजा है। इनमें तीन सौ से अधिक देवी-देवताओं के शरीक होने का अनुमान है। देवी-देवताओं की सात दिनों तक बैठने के लिए जगह की व्यवस्था की गई है। तंबू लगाए जा रहे हैं। करीब सौ देवी-देवताओं को कैनोपी देने की योजना है। पिछली बार 40 देवी-देवताओं को कैनाेपी दी गई थी। अधिकतर देवी-देवताओं के लिए तिरपाल के तंबू बनाए जा रहे हैं।
सात दिन तक तंबू बनेंगे देवालय
सात दिनों के लिए तंबू ही देवालय में बदलेंगे। देवी-देवताओं की सुबह और शाम को पूजा और आरती भी तंबुओं में होगी। अस्थायी शिविरों में सुबह-शाम देव ध्वनियां गूंजेंगी। क्षेत्र पूरी तरह से भक्तिमय हो जाएगा। दो से 8 अक्तूबर तक अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव मनाया जाएगा।