जिला मुख्यालय में एक ढाबा में लगा ताला। संवाद
कुल्लू। व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की कमी के चलते शहर में ढाबों और रेस्तरां पर संकट गहरा गया है। कई स्थानों पर ढाबों और रेहड़ी-फड़ियों को बंद करना पड़ा है। कुछ संचालक कारोबार चलाने के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा ले रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बजौरा से कुल्लू-मनाली हाईवे-तीन और जिला मुख्यालय में स्थित कई ढाबे, रेस्तरां और रेहड़ी-फड़ियां सिलिंडर की कमी के कारण बंद हो गई हैं। इससे सैकड़ों कारोबारी प्रभावित हुए हैं।
जिले में बजौरा से मनाली तक फोरलेन और हाईवे किनारे संचालित कई ढाबों और रेस्तरां में गैस सिलिंडर की कमी के चलते कामकाज प्रभावित हुआ है। शहर में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। जो ढाबे और रेस्तरां वैकल्पिक साधनों—जैसे इंडक्शन, हीटर, डीजल स्टोव और केरोसिन स्टोव से काम चला रहे हैं, उनका कारोबार भी धीमा पड़ गया है। इन साधनों से भोजन तैयार करने में अधिक समय लग रहा है। जहां गैस सिलिंडर पर एक परांठा तैयार करने में लगभग पांच मिनट लगते थे, वहीं अब 15 से 20 मिनट का समय लग रहा है।
शहर में नीलम ढाबा सहित कई रेहड़ी-फड़ियां बंद हो चुकी हैं, जबकि अन्य कई ढाबे पहले से ही प्रभावित हैं। ढाबा संचालक कुलदीप ठाकुर, रमेश शर्मा और सेवता देवी ने बताया कि गैस सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं और वैकल्पिक साधनों पर खर्च अधिक है। ऐसे में उन्होंने अपने प्रतिष्ठान बंद करना ही बेहतर समझा।
उधर, जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक शिव राम राही ने कहा कि जिले में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति नियमित रूप से हो रही है। उन्होंने बताया कि ढाबा और रेस्तरां संचालक अपने लेटरहेड पर संबंधित गैस एजेंसी को आवेदन दें, जिसके बाद उन्हें सिलिंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही उन्होंने व्यापारियों से वैकल्पिक साधनों का भी उपयोग करने की अपील की। संवाद
जिला मुख्यालय में एक ढाबा में लगा ताला। संवाद