न्यूली (कुल्लू)। सैंज घाटी के देवता मनु ऋषि और माता शतरूपा रविवार को देवालय पहुंच गए हैं। करीब 12 दिन पहले दोनों देवी-देवता अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा की शोभा बढ़ाने कुल्लू गए थे। एक सप्ताह तक दोनों ने अठारह करड़ू की सौह में रहकर दशहरा की परंपरा का निर्वहन किया। इस दौरान श्रद्धालुओं को दर्शन भी दिए। कुल्लू दशहरा में भाग लेने के चलते शैंशर स्थित देवता मनु ऋषि और मैल में स्थित माता शतरूपा के देवालय सूने पड़े थे। अब इनके देवालय लौटने से रौनक लौट आई है।
देवता मनु ऋषि के कारदार प्रेम सिंह ठाकुर और माता शतरूपा के कारदार देवराज ठाकुर ने कहा कि दोनों देवी-देवता दशहरा की परंपरा का निर्वहन करने कुल्लू जाते हैं। एक सप्ताह तक कुल्लू में रहने के बाद लंका दहन की रस्म का निर्वहन होने के उपरांत ये अपने देवालय लौट आते हैं। कहा कि विगत शनिवार को दोनों ने लारजी में रात्रि विश्राम किया और सुबह लारजी से अपने-अपने देवालयों की ओर निकल पड़े। कहा कि देर शाम देवता मनु ऋषि शैंशर और माता शतरूपा मैल गांव में स्थित अपने देवालय पहुंचीं। संवाद