साढ़े तीन महीने के बाद माता बूढ़ी नागिन मंदिर के खुले कपाट
बैसाख संक्रांति पर लगा मेला, अब नवंबर तक आ सकेंगे श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बैसाख संक्रांति पर जिले में देवी-देवताओं ने मंदिर से निकल कर अपने हारियानों को दर्शन देकर सुख-शांति का आशीर्वाद दिया। इस दौरान 10,500 फीट ऊंचे सरयोलसर में विराजमान माता बूढ़ी नागिन के कपाट भी शनिवार को संक्रांति के दिन खुल गए हैं। अब पुजारी माता की नियमित रूप से पूजा पाठ करेंगे। नवंबर तक श्रद्धालु माता के दर्शन कर सकेंगे। शनिवार को बैसाख संक्रांति को यहां भारी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे थे। लोगों ने मन्नत के रूप में घी की परिक्रमा की।
मंदिर में साढ़े तीन महीने के बाद माता की जयकार हुई। बैसाख संक्रांति के दिन माता के दर्शन पाकर श्रद्धालु धन्य हुए। संक्रांति पर सरयोलसर में लगने वाले मेले में सैकड़ों की संख्या में दूर-दूर से भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचे। बताया जा रहा है कि कई भक्तों ने यहां एक दिन पहले ही डेरा डाल रखा था। रातभर माता की वास स्थली में रहकर माता का गुणगान किया।
अब नवंबर तक माता की नियमित पूजा-अर्चना होगी और यहां पर्यटकों के साथ स्थानीय श्रद्धालुओं का भी तांता लगा रहेगा। माता के कपाट खुलने से बंजार और बाह्य सराज आनी-निरमंड क्षेत्र के साथ रामपुर, कुमारसैन, करसोग आदि इलाकों के लोगों में खुशी की लहर है। माता के कारदार भागे राम राणा ने कहा, माता के कपाट बैसाख संक्रांति के दिन खुल गए हैं।
आने वाले दिनों में कोई भक्त सरयोलसर झील में स्नान न करें। उन्होंने देव नियमों का पालन करने तथा झील की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की। बता दें कि माता बूढ़ी नागिन की वास स्थली सरयोलसर को लेकर लोगों में गहरी आस्था है। यहां कुल्लू और मंडी जिलों के देवी-देवता शाही स्नान के लिए आते हैं। संवाद