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भगवान नरसिंह की जलेब में देवताओं संग थिरके देवलु

Fri, 14 Oct 2016 07:40 PM IST
कुल्लू
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devta raghunath - फोटो : devta raghunath
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अंतरराष्ट्रीय दशहरा के अवसर पर ढालपुर मैदान में चौथे दिन भगवान नरसिंह की भव्य शाही जलेब निकाली गई। ढोल नगाड़ों की थाप पर देवताओं संग देवलु भी जमकर थिरके। नरसिंह भगवान की चौथी भव्य जलेब में जिला कुल्लू के आराध्य देवता रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह भी पालकी में सवार हुए। नरसिंह भगवान ने जलेब के माध्यम से ढालपुर मैदान के चारों ओर रक्षा का सूत्र बांधा।  शुक्रवार को निकली जलेब में सैंज घाटी के सात देवी-देवता शामिल हुए। सैंज वैली में सैंज के लक्ष्मी नारायण, गोही की कमला भगवती, रैला की माता आशापुरी, गर्ग ऋषि, शैंशर के देवता मनु ऋषि, रैला के देवता लक्ष्मी नारायण, बनोगी देहुरी के देवता पुंडरिक ऋषि ने लाव लश्कर के साथ भव्य जलेब में शिरकत की।
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करीब चार बजे राजा की चानणी के पास सैंज घाटी के देवी देवताओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ। सवा चार बजे भगवान नरसिंह की घोड़ी आगे-आगे चली। इसके बाद सैंज घाटी के देवता आगे चले और रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह की पालकी पीछे-पीछे चली। ढोल नगाड़ों की थाप पर देवताओं के साथ-साथ देवलु भी थिरके। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का मुख्य आकर्षण बनने वाली भव्य जलेब को देखने के लिए लोगों को भीड़ उमड़ी। कुल्लू दशहरे में इसका विशेष महत्व रहता है। मौहल्ला उत्सव होने तक प्रतिदिन कुल्लू दशहरा में जलेब निकाली जाएगी। वहीं विदेशी और देशी मेहमानों ने भी जलेब का खूब लुत्फ उठाया। मान्यता यह है कि आसुरी शक्तियों का प्रभाव दशहरा में सम्मलित हुए देव समाज पर न हो। भगवान नरसिंह की जलेब को सुरक्षा घेरा भी कहा जाता है।
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