भूस्खलन से गांव की नींव हिली, 14 घरों में आईं दरारें, चार करने पड़े खाली
ग्रामीणों ने संस्कृति और पर्यावरण बचाने के लिए मोड़ दी थी जलोड़ी टनल की दिशा
गौरीशंकर
कुल्लू। जिस सोझा गांव ने अपनी पहचान, संस्कृति और पर्यावरण बचाने के लिए जलोड़ी टनल की दिशा मोड़ दी थी, आज वही गांव धरती की दरारों में फंसता जा रहा है। भूस्खलन और नाले के कटाव से गांव की नींव चरमराने लगी है।
14 घरों में दरारें आ गई हैं। चार घर खाली करने पड़े हैं। एक समय जिसे जीत कहा गया था, अब वह लड़ाई असहाय पलायन में बदलती दिख रही है। लोग कहते हैं कि सोझा गांव के नीचे का हिस्सा खिसक रहा है। गांव के पीछे भी दरारें आई हैं। पूरा गांव खतरे में पड़ गया है।
प्रभावितों ने कहा कि वे अपने गांव की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए जलोड़ी टनल की अलाइनमेंट बदलने में कामयाब हुए थे लेकिन प्राकृतिक आपदा ने गांव को जकड़ लिया है। लोग अब घर छोड़ने पर मजबूर हैं। प्रभावित टेक सिंह ठाकुर और टेक सिंह ने कहा कि घरों में घरों में दरारें आई हैं। सोझा वैली टूरिज्म एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र प्रकाश ने कहा कि गांव के नीचे नाले से कटाव हो रहा है। इस कारण क्षेत्र खिसक रहा है। सोझा गांव के घरों में दरारें आ चुकी हैं। आने वाले समय में भी गांव को खतरा बना हुआ है।
सोझा गांव के घरों में दरारें आई हैं। चार घर खाली किए गए हैं। अन्य घर भी खतरे में हैं। भू वैज्ञानिक सर्वे करने की सिफारिश की गई है जिससे वैज्ञानिक तकनीक से गांव को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासनिक तौर पर पुनर्वास का कार्य किया जा रहा है। - पंकज शर्मा, उपमंडल अधिकारी बंजार
पर्यटकों को भी भाता है देवदार के जंगलों से घिरा सोझा गांव
एनएच-305 में घियागी और जलोड़ीपास के बीच एक सुंदर स्थल सोझा है। यह पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। सदियों पुराना गांव देवदार के घने जंगलों से घिरा होने के कारण पर्यटकों को खूब भा रहा है। जलोड़ी पास से पांच किलोमीटर पहले बसे इस गांव में पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था है। होम स्टे से लेकर होटल तक की सुविधा है। प्राचीन शैली का गांव भी है लेकिन अब यह खतरे में पड़ गया है।