सैंज (कुल्लू)। टीजीटी हिंदी और टीजीटी संस्कृत पदनाम देने के बावजूद पदलाभ न देना दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर विभाग ने शास्त्री और भाषा अध्यापकों की योग्यता टीजीटी के समान रखी है तो पदलाभ देने में विभाग को पीछे नहीं हटना चाहिए। राजकीय सीएंडवी अध्यापक संघ खंड सैंज के प्रधान मनोज शर्मा ने यह बात कही।
कहा कि जब विभाग ने वर्ष 2022 में स्वयं टीजीटी पदनाम दिया है तो पदलाभ न दिया जाना अध्यापकों के साथ अन्याय है। संघ के महासचिव पदम ठाकुर और कोषाध्यक्ष चुनी लाल सहित सभी पदाधिकारियों ने सीएंडवी अध्यापकों को 20 वर्ष के सेवाकाल के बाद मिलने वाली दो विशेष वेतनवृद्धियों को जारी रखने की भी मांग की है। समग्र शिक्षा द्वारा छठी, सातवीं कक्षा की एसए-दो मूल्यांकन की डेट शीट को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संघ ने कहा कि इस डेट शीट में इलेक्टिव लिख कर कला, स्वर संगीत व गृह विज्ञान आदि विषयों को स्पष्ट रूप से लिखा ही नहीं है। हिमाचल की लोक संस्कृति एवं योग को भी गलत नाम लोक संस्कृति लिखा है।
मनोज ने कहा कि सीबीएसई के प्रयोग के बजाय हिमाचल शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए। प्राथमिक पाठशालाओं में अध्यापकों की भर्ती कक्षावार की जाए ताकि विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ सके। एसएमसी अध्यापकों की एलडीआर परीक्षा में पाठ्यक्रम के बाहर से आए प्रश्नों पर कृपांक दिए जाएं, लंबित डीए को जल्द जारी किया जाए। उन्होंने सैंज खंड के दुर्गम क्षेत्र के स्कूलों हाई स्कूल मझान, मिडल स्कूल शाकटी, लपाह व पाशी आदि को हार्ड एरिया घोषित करने की मांग की है। संवाद