कुल्लू/खराहल। जिले में लहसुन उत्पादक सूखे से चिंतित हैं। करीब डेढ़ माह से ज्यादा समय से पर्याप्त बारिश न होने से लहसुन की फसल सूखने लगी है। इससे पैदावार पर विपरीत असर पड़ रहा है। बागवानों को नुकसान की चिंता सता रही है।
जिले में 40 फीसदी लहसुन की फसल सूखे से प्रभावित हो चुकी है। सबसे अधिक परेशानी उन किसानों को है, जो सिंचाई के लिए पूरी तरह से बारिश पर निर्भर हैं। जिले में गत डेढ़ माह से पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। हालांकि बूंदाबांदी और अंधड़ से फसल को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाई है। ऐसे में लहसुन के उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
इससे किसानों का उत्पादन भी घट जाएगा। किसानों का कहना है कि लहसुन की फसल मई महीने के पहले पखवाडे़ में तैयार हो जाती है। मगर इस समय लहसुन के लिए सिंचाई की बहुत जरूरी है। लहसुन के आकार में वृद्धि की प्रक्रिया चल रही होती है। अगर पानी नहीं मिलता है तो आकार छोटा रह जाता है।
कुल्लू में करोड़ों का कारोबार
जिला कुल्लू में हर साल लहसुन का करोड़ों का कारोबार होता है। निचले इलाकों में इसकी पैदावार बडे़ स्तर होती है। अच्छी फसल होने पर करीब 19000 मीट्रिक टन उत्पादन कुल्लू में होता है। सूबे में 58000 मीट्रिक टन उत्पादन होता है, लेकिन इस बार सूखे की वजह से उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है। जिले में करीब 20 हजार किसानों लहसुन की खेती से जुड़े हैं।
महंगे दर पर खरीदा बीज
किसान अमित ठाकुर, अनूप ठाकुर, ज्ञान ठाकुर, बुद्धि प्रकाश, राम नाथ और सुशील भंडारी ने कहा कि 120 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से उन्होंने बीज खरीदा है। मार्च और अप्रैल में बारिश की अधिक जरूरत रहती है, लेकिन बारिश न होने से लहसुन फसल पीली होकर सूख रही है। कृषि विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. पंजवीर ठाकुर ने बताया कि किसानों को समय पर फसल का बीमा करना चाहिए। बारिश पर्याप्त न होने से इस बार सूखे से सभी फसलों को नुकसान हो रहा है। नगदी फसल को बचाने के लिए किसान सिंचाई करें।