कानों में टैग लगे मवेशी बन रहे हादसों का कारण, लोगों पर भी कर रहे हमला
गलियों में भटक रहे लावारिस मवेशी खोल रहे प्रशासन और नप के दावों की पोल
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। शहर में मवेशी नहीं, व्यवस्था भटक रही है। कुल्लू जैसे जिला मुख्यालय के हनुमानी बाग में गोशाला होने के बावजूद सड़कों, गलियों और बाजारों में बेसहारा मवेशी घूम रहे हैं।
कानों में टैग लगे मवेशी प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। बढ़ते हादसे और लोगों पर हमले व्यवस्था की नाकामी को उजागर कर रहे हैं। गोशाला क्षमता से अधिक भर चुकी है और जिम्मेदारी तय न होने का खामियाजा आम लोग, यात्री और खुद मवेशी भुगत रहे हैं।
हैरानी की बात है कि सड़क पर घूम रहे अधिकतर मवेशियों के कानों में टैग लगे हैं। इनके मालिकों को खोजकर उनके खिलाफ कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो पाया है। जिला मुख्यालय कुल्लू में अस्पताल के आसपास, कॉलेज गेट, मालरोड, ढालपुर मैदान, लोअर ढालपुर, सरवरी, अखाड़ा बाजार, गांधीनगर, शास्त्रीनगर आदि क्षेत्रों में अकसर बेसहारा मवेशियों को देखा जा सकता है। ये सड़क पर दुर्घटनाओं को भी न्योता दे रहे हैं। साथ ही लोगों पर भी हमला कर रहे हैं।
गोशाला में भरे जा रहे क्षमता से अधिक मवेशी
जिला मुख्यालय में चलाई जा रही गोशाला में क्षमता से अधिक मवेशियों को भरा जा रहा है। संचालकों की मानें तो हालांकि हनुमानी बाग में बनी गोशाला की क्षमता 150 तक मवेशियों के रखने की है लेकिन यहां 250 से अधिक मवेशियों को भरा गया है। इससे आपस में भी मवेशी लड़ते हुए एक दूसरे को घायल कर रहे हैं।
हनुमानी बाग में चल रहे गोसदन में वर्तमान में 250 से अधिक मवेशियों को रखा गया है। इनके भरण-पोषण के लिए अपने बगीचे से घास लानी पड़ रही है। संस्था मवेशियों की पूरी सेवा कर रही है। गोसदन की क्षमता ज्यादा न होने से अधिक मवेशियों को रखना मुसीबत बन रहा है। - नवनीत सूद, अध्यक्ष गोसदन संचालन समिति
बेसहारा भटक रहे मवेशियों को सहारा देने के लिए प्रशासन, विभाग और नगर परिषद को उचित योजना बनाने की जरूरत है ताकि सड़क और गलियों में घूम रहे मवेशियों को सही से रखा जा सके। - हरीश नैय्यर, कुल्लू
कड़ाके की ठंड में बेसहारा मवेशी सड़कों पर भटक रहे हैं। इन्हें बेसहारा छोड़ने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए। बेसहारा मवेशियों के लिए जल्द प्रशासन को प्रबंध करना चाहिए। - हुकम प्रेमी, कुल्लू