कुल्लू। चंद्रा नदी को ब्यास नदी में मिलाने से नुकसान होगा। पीर पंजाल के दोनों ओर की भूमि पर्यावरणीय दृष्टि से अति नाजुक है और पिछले कुछ साल से भूस्खलन और भू9कटाव के लिए अतिसक्रिय हो चुकी है। ऐसे में केंद्र सरकार की यह परियोजना इस पूरे भूखंड को नुकसान पहुंचाएगी। यह बात सेव लाहौल-स्पीति सोसायटी के अध्यक्ष बीएस राणा ने कही।
उन्होंने कहा कि ब्यास के बहाव से कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और पंजाब तक के लिए घातक होगी। कहा कि सोसायटी सीमांत क्षेत्रों में पड़ोसी देशों द्वारा की हिंसात्मक वृत्तियों का विरोध करते हैं लेकिन विरोध प्रदर्शन का यह तरीका और भी अमानवीय और असंगत है। अंधाधुंध विकास के इस मॉडल से सहमत नहीं है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि हिमालय के इस नाजुक भूखंड के निवासियों के हित में इस प्रस्तावित परियोजना पर पुनर्विचार करना चाहिए। अन्यथा संस्था को आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ेगा। संवाद