कुल्लू में सीटू के कार्यकर्ता किसान और मजदूर बिल के विरोध में उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्श?
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कुल्लू। सीटू जिला कुल्लू कमेटी ने केंद्रीय कमेटी के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बुधवार को डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सैकड़ों मजदूरों ने भाग लिया। सीटू जिला कमेटी के महासचिव राजेश ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व में केंद्र की एनडीए सरकार पिछले छह वर्षों से लगातार देशी और विदेशी पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए मजदूर विरोधी नीतियों को लागू कर रही है।
सितंबर 2020 में संसद सत्र में बिना चर्चा किए श्रम सुधारों के नाम पर सभी श्रम कानूनों को खत्म कर जो चार श्रम संहिताओं को बनाया गया है, उनके लागू होने से आने वाले समय में मजदूर वर्ग पूंजीपतियों के गुलाम हो जाएंगे। यह मजदूर वर्ग से सबसे बड़ा धोखा है। ऐसे में सीटू की अखिल भारतीय वर्किंग कमेटी ने आंदोलन करने का फैसला लिया है। इन श्रम संहिताओं के नाम पर काम के घंटे 8 से 12 करने की कोशिश की जा रही है। नियमित रोजगार की जगह फिक्सटर्म नौकरी का प्रावधान किया जा रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि में उद्योगपतियों का अंशदान 12 प्रतिशत से कम कर 10 प्रतिशत किया गया है। निर्माण मजदूरों के लिए गठित श्रमिक कल्याण बोर्ड के पैसों को केंद्र सरकार के पास जमा कर श्रमिक कल्याण बोर्डों को कमजोर किया जा रहा है। सीटू ने चार श्रम संहिताओं व तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने, बिजली बिल 2020 को वापस लेने की मांग की है। केंद्र की ओर से पेश किए बजट का भी विरोध किया गया। सीटूूू ने कहा कि यह बजट आम जनता, मजदूर-किसान विरोधी है। केंद्र ने मनरेगा के बजट में 41 प्रतिशत की कटौती की है। आंगनबाड़ी के बजट में 30 प्रतिशत की कटौती व मिड-डे मील के बजट में 1400 करोड़ की कटौती की है। सीटू के जिला कोषाध्यक्ष भूप सिंह भंडारी, भवन एवं सड़क निर्माण यूनियन के जिला प्रधान राम चंद, सचिव चमन ठाकुर, किसान मजदूर नेता होतम सिंह सौखला तथा पूर्ण ठाकुर ने भी प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया।