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शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं मिलने से लौटे मायूस

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क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में सोमवार को बंद पड़ी शिशु रोग ओपीडी के बरही बैठे लोग। - फोटो : Kullu
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कुल्लू। जिले के दूरदराज क्षेत्रों से किराया खर्च कर अपने बच्चों का उपचार करवाने आए लोगों को शिशु रोग विशेषज्ञ न मिलने से निराश होकर लौटना पड़ा। यह सिलसिला कई दिनों से चल रहा है। कुल्लू अस्पताल की शिशु रोग ओपीडी में सोमवार को भी अन्य दिनों की तरह दिनभर ताला लटका रहा। बच्चे का दर्द देखकर कई माता-पिता ने उनको अस्पताल के कमरा नंबर 116 में पुरुष ओपीडी में दिखा दिया।
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अधिकतर लोग शिशु रोग ओपीडी के बाहर ताला लटका हुआ देखकर लौट गए। रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को सुबह 9.30 बजे लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। अस्पताल की पर्ची बनाने वाले काउंटर पर लोगों की लाइन लग गई थी। दस बजे तक महिला ओपीडी, नेत्र रोग, ईएनटी ओपीडी आदि के बाहर मरीजों की कतारें लगना शुरू हो गई। लेकिन जैसे ही पर्ची बनाकर लोग शिशु रोग ओपीडी के बाहर पहुंचे तो यहां ताला लटका हुआ था। अस्पताल की अन्य ओपीडी सामान्य रूप से चल रही थी। 11 बजे तक खराहल, सैंज, ऊझी और पार्वती घाटी के कई लोग अपने बीमार बच्चे लेकर पहुंचे थे। लेकिन यहां ताला लटका था। पूछताछ करने पर पता चला कि डॉक्टर नहीं है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में पिछले करीब एक महीने से शिशु रोग विशेषज्ञ का डॉक्टर नहीं है। शिशु रोग का एक भी डॉक्टर न होने से मरीजों को यहां मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल के लिए एक शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के आदेश भी हुए हैं। लेकिन डॉक्टर ने अभी तक ज्वाइन नहीं किया है।
पार्वती घाटी में कझियारी गांव के गुरदयाल ने कहा कि उनकी बेटी दीया बीमार है। उसे उपचार के लिए कुल्लू अस्पताल लाए है। अमर उजाला को बताया कि वह 35 किलोमीटर दूर से आए है। इसके बाद उनको ओपीडी में ताला लटका हुआ मिलने से निराशा हाथ लगी है। नेपाली मूल की कामगार आरती ने कहा कि उनके बेटे को बुखार था। जिले के सबसे बड़े अस्पताल में डॉक्टर न होने से उनको परेशानी हो रही है। खराहल के विजय कुमार ने कहा कि अस्पताल में डॉक्टर न होने से उन्हें अपने बच्चे का उपचार निजी अस्पताल में करवाना पड़ा है। गाहर के श्याम लाल ने कहा कि विभाग व सरकार की लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कुल्लू के अलावा लाहौल-स्पीति, चंबा जिले के पांगी और मंडी के सीमांत क्षेत्रों को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने वाले क्षेत्रीय अस्पताल में वर्तमान में एक भी सर्जन नहीं है। सर्जन डॉक्टर न होने से ऑपरेशन आदि की मरीजों को लंबी तारीख दी जा रही है। पिछले करीब तीन महीनों से लोग परेशानी झेल रहे हैं। उधर, इस संबंध में क्षेत्रीय अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीना लाल ने कहा कि अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ के आदेश हुए हैं। लेकिन डॉक्टर ने अभी ज्वाइन नहीं किया है। विभाग के उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया है।
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निजी अस्पताल कूट रहे चांदी
क्षेत्रीय अस्पताल में असुविधाओं के अभाव में लोग निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। निजी अस्पताल खूब चांदी कूट रहे हैं। अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं होने से गरीब, मजदूर वर्ग को निजी अस्पताल में महंगा इलाज करवाने के लिए अपनी कमाई लूटानी पड़ रही है।
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