कुल्लू में कुलवी बोली पर आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेते प्रतिभागी।-डीपीआरओ
कुल्लू। जिले के नौनिहालों ने कुल्लवी संस्कृति से रूबरू करवाया। पहली से पांचवीं कक्षा तक के कलाकारों ने प्रस्तुतियां देकर संस्कृति की झलक दिखाई। उन्होंने दर्शक दीर्घा में बैठे अधिकारियों, शिक्षकों, अभिभावकों को संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के विषय में सोचने और मंथन करने के लिए विवश किया। इन कलाकारों में सबसे छोटी उम्र की कलाकार कराल क्षेत्र की रूहिका रहीं। रूहिका की उम्र महज चार साल है।
देवसदन में भाषा विभाग कुल्लू ने भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया। इसमें पांचवीं कक्षा तक के नौनिहालों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता कुल्लवी बोली विषय पर करवाई गई। इसके माध्यम से नौनिहालों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का प्रयास रहा। बच्चों ने भाषण के माध्यम से कुल्लवी बोली, व्यंजनों, वेशभूषा और रहन-सहन की जानकारी दी। मंच पर कलाकारों के बेझिझक होकर अपनी प्रस्तुतियां दीं।
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मंच पर प्रस्तुति देने का अपना एक अलग अनुभव होता है। इसी अनुभव को देवसदन में आयोजित प्रतियोगिता में अनुभव करने का मौका मिला है। मैं ऑनलाइन ब्लॉग भी बनाता हूं।
-श्रेयान सागर
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विद्यालय में पता चला कि कुल्लू में भाषण प्रतियोगिता है। मैंने शिक्षकों और अभिभावकों के समक्ष इसमें भाग लेने की बात रखी। उन्होंने मुझे जाने की अनुमति दी। इससे मेरा मनोबल बढ़ा है।
-रूहिका
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भाषा विभाग के इस कार्यक्रम ने कलाकारों को प्रतिभा दिखाने का मौका प्रदान किया है। देवसदन के मंच पर प्रस्तुति देने से स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। -सृष्टि
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इस प्रतियोगिता से प्रतिस्पर्धा का अवसर मिला है। कई कलाकारों ने देवसदन के मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाई। मैंने भी कुल्लवी संस्कृति पर अपनी बात सबके समक्ष रखी।
-नव्या