जिला की स्थानीय सब्जी मंडियों में कुछ आढ़ती विपणन
बोर्ड की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। ऐसे आढ़ती विपणन बोर्ड को रोजाना
लाखों की चपत लगा रहे हैं। आरोप है कि किसानों-बागवानों तथा बाह्य
व्यापारियों को आर तथा क्यू फार्म नहीं दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, इन
आढ़तियों द्वारा किसानों-बागवानों को अपना उत्पाद बेचने के बाद पक्का बिल
भी नहीं दिया जा रहा है। आर तथा क्यू फार्म पर टोटल बिल का एक प्रतिशत पैसा
आढ़तियों को विपणन बोर्ड को देना पड़ता है। लेकिन, फार्म न देने तथा बिल न
देने से बोर्ड को रोजाना लाखों की चपत लग रही है।
सेब उत्पादन में
अग्रणी कुल्लू घाटी की इन सब्जी मंडियों में प्रतिवर्ष करोड़ों के सेब की
खरीद-फरोख्त होती है। जिला में संचालित सब्जी मंडियों में आढ़ती ऐसा कर
बोर्ड को खासी चपत लगा रहे हैं। बागवान दिले राम, चंदू राम तथा शेर सिंह ने
कहा कि वे इस सीजन में जब-जब सब्जी मंडी में अपने उत्पाद बेचने गए तो
उन्हें आर फार्म नहीं दिया गया। गौरतलब है कि आर फार्म बोली के बाद आढ़ती
बागवान को देता है, जबकि क्यू फार्म सेब से भरी गाड़ी मंडी से बाहर जाते
समय आढ़ती की ओर से देना होता है।
दोनों ही फार्म जरूरी हैं, जिन्हें
आढ़तियों द्वारा नहीं दिया जा रहा है। इससे बोर्ड को लाखों की चपत लग रही
है। बंदरोल आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन हुक्म ठाकुर ने आरोपों को सिरे से
खारिज किया है। उधर, विपणन बोर्ड के सचिव सुशील गुलेरिया ने कहा कि फिलहाल
उन्हें इस प्रकार की शिकायत नहीं मिली है। अगर ऐसा है तो पकड़े जाने पर ऐसे
आढ़तियों के लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे।