हिमाचल: चंद्रताल की खूबसूरती बनी मुसीबत? कभी गूंजता था सन्नाटा, अब गाड़ियों की कतार और पर्यटकों की भीड़
Sun, 04 Oct 2026 10:16 AM IST
Ankesh Dogra
अशोक राणा/रतन कटोच/केलांग/सिस्सू (लाहौल स्पीति)।
सार
लाहौल-स्पीति की खूबसूरत चंद्रताल झील इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बनी हुई है। 2 अक्तूबर को करीब 550 वाहन चंद्रताल पहुंचे और 3,000 से अधिक पर्यटकों ने झील का दीदार किया। वाहनों की भारी संख्या के कारण कई घंटे तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही। जहां पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों की आर्थिकी को फायदा हो रहा है, वहीं चंद्रताल की संवेदनशील पारिस्थितिकी पर दबाव बढ़ने की चिंता भी जताई जा रही है।
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की पहचान बन चुकी चंद्रताल झील इन दिनों पर्यटकों से गुलजार है। कभी सीमित पर्यटकों की पहुंच वाली इस प्राकृतिक खूबसूरती को देखने के लिए अब बड़ी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। 2 अक्तूबर को चंद्रताल में पर्यटकों की भीड़ इतनी बढ़ गई कि बड़ी संख्या में वाहनों के पहुंचने से कई घंटे तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही।
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जानकारी के अनुसार शुक्रवार को करीब 550 पर्यटक वाहन चंद्रताल पहुंचे, जबकि 3,000 से अधिक पर्यटकों ने झील की खूबसूरती का दीदार किया। इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने से एक ओर स्थानीय कारोबारियों और लोगों के चेहरे पर रौनक देखने को मिल रही है, तो दूसरी ओर पर्यावरण विशेषज्ञ और प्रकृति प्रेमी संवेदनशील क्षेत्र पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंतित हैं।
चंद्रताल क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ बेहद नाजुक पारिस्थितिकी के लिए भी जाना जाता है। यहां का वातावरण ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सामान्य पर्यटन स्थलों की तुलना में अधिक संवेदनशील माना जाता है।
पर्यटन बढ़ा तो स्थानीय आर्थिकी को मिला सहारा
चंद्रताल और लाहौल-स्पीति के अन्य पर्यटन स्थलों पर बढ़ती पर्यटकों की संख्या स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसर लेकर आई है। होटल, होमस्टे, टैक्सी, ढाबे और अन्य पर्यटन गतिविधियों से जुड़े कारोबार को इसका लाभ मिल रहा है। लेकिन पर्यटकों और वाहनों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी ने दूसरी चुनौती भी खड़ी कर दी है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि संवेदनशील इलाके में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ वाहनों और पर्यटकों की संख्या को नियंत्रित करने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
पर्यावरण प्रेमी कुंजलाल और दीपक ने चंद्रताल की संवेदनशील पारिस्थितिकी को देखते हुए पर्यटकों और वाहनों की संख्या नियंत्रित करने की आवश्यकता जताई है। उनका कहना है कि प्राकृतिक क्षेत्र की क्षमता को ध्यान में रखते हुए पर्यटन गतिविधियों का प्रबंधन जरूरी है।
कोकसर में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ी
उधर, कोकसर पुलिस चेकपोस्ट पर तैनात एएसआई शाम लाल ने बताया कि इन दिनों लाहौल की ओर आने वाले पर्यटकों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। चंद्रताल जैसे क्षेत्रों में बढ़ती पर्यटकों की आवाजाही ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण का संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले समय में यदि पर्यटकों की संख्या इसी तरह बढ़ती है तो पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन, कचरा प्रबंधन और संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्रों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा।