कुल्लू। रघुपुर घाटी में दुग्ध उत्पादकों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर दूध के कम दाम मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दूध की हेराफेरी का मामला सामने आने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है। रोजाना 10 से 12 लीटर दूध की कथित कटौती से उत्पादकों को हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे घाटी के किसानों में रोष व्याप्त है।
बालू, लोट, बनाला और गनोचा आदि गांवों से एक सोसायटी दूध एकत्रित करती है। गांवों के करीब 20 से 25 लोग सोसायटी को दूध बेचते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ समय से सोसायटी दूध में हेराफेरी कर रही है। हर बार दूध में करीब 10 से 12 लीटर की कटौती की जा रही है। हर माह करीब 400 लीटर दूध का नुकसान हो रहा है।
सोमवार को गांवों के लोगों ने 130 लीटर दूध दिया। बिल में कटौती कर इसे 122 लीटर कर दिया गया। आठ लीटर दूध क्यों काटा, इसका कोई हिसाब किताब नहीं दिया गया। इससे पहले सात अप्रैल को 102 लीटर दूध दिया गया था। बिल में 90 लीटर दिखाया गया, जो 12 लीटर कम है। दुग्ध उत्पादकों किशोरी लाल, झगड़ सिंह और होशियार सिंह ने कहा कि उनके साथ हर दिन हेराफेरी की जा रही है। उनके इलाके में अन्य सोसायटियों की ओर से भी दूध खरीदा जाता है, लेकिन वे इस तरह की हेराफेरी नहीं करती हैं।
कहा कि दूध में की जा रही कटौती से हर माह डेढ़ से दो हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। कहा कि विरोध करने पर भी समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ दूध का दाम 35 से 36 रुपये प्रति लीटर दिया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ दूध की मात्रा को कम किया जा रहा है।उन्होने मिल्कफेड से समस्या का समाधान करने की मांग उठाई है।
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सोसायटी स्तर पर की जा रही मनमानी को रोकने के लिए फेडरेशन प्रयासरत है। इसका जल्द निरीक्षण किया जाएगा। दुग्ध उत्पादकों की समस्या का हल किया जाएगा।
-बुद्धि सिंह ठाकुर, अध्यक्ष, मिल्कफेड
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