कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में सात दिन तक देव परंपराओं का निर्वहन करने के बाद आराध्य देवता बिजली महादेव ने अपने देवालय की ओर बुधवार को प्रस्थान किया। यात्रा के दौरान देवता का जगह-जगह श्रद्धालुओं ने फूल मालाओं से स्वागत किया।
देवता बिजली महादेव मंगलवार को लंका दहन की परंपरा को निभाने के उपरांत अधिष्ठाता रघुनाथ के साथ अठारह करडू सौह से सुल्तानपुर के लिए रवाना हुए थे।
बुधवार को देवता सैकड़ों हारियानों-कारकूनों, वाद्ययंत्रों और नरसिंगों की मंगल ध्वनि के बीच खराहल घाटी के त्रांबली गांव में स्थित अपने देवालय पहुंचे। देवता के दशहरा से मूल मंदिर तक का यह पहला पड़ाव रहा।
हालांकि इससे पहले सुल्तानपुर में देवता बिजली महादेव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। अस्थायी शिविर में देवता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का आना-जाना अपराह्न 02:30 बजे तक जारी रहा।
इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आराध्य देवता के समक्ष शीश नवाया और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। अपराह्न 2:30 बजे देवता की मूल मंदिर की ओर वापसी का पहला पड़ाव शुरू हुआ।
देवता के कारदार विनेंद्र जंबाल ने कहा कि देवता सरवरी, अखाड़ा बाजार, चौकी डोभी, डोभी, चझंड़, बारी होते हुए त्रांबली गांव में करीब शाम 4:15 बजे पहुंचे।