पतलीकूहल (कुल्लू)। जिले में सेब की कम पैदावार से पहले ही आर्थिक नुकसान की चिंता झेल रहे बागवानों की मुश्किलें अब चमगादड़ों ने और बढ़ा दी हैं।
ऊझी घाटी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चमगादड़ सेब की तैयार हो रही फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। फसल बचाने के लिए बागवानों को सेब की तुड़ान समय से पहले करनी पड़ रही है। इससे उन्हें मंडियों में फल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।
ऊझी घाटी के सोयल, खखनाल, जगतसुख, हरिपुर, फोजल और हलाण सहित आसपास के इलाकों में चमगादड़ों के हमले से सेब की फसल प्रभावित हो रही है। इन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की कुछ किस्में अक्तूबर के दूसरे सप्ताह तक पूरी तरह तैयार होकर बाजार में पहुंचने के काबिल बनती हैं।
बागवानों को उम्मीद रहती है कि सेब को उचित समय तक पेड़ों पर पकने दिया जाए, ताकि फल का आकार, वजन और गुणवत्ता बेहतर हो सके और मंडियों में अच्छी कीमत मिल सके।
बागवान बुधराम, राज कुमार, सुशील, विजय ठाकुर, पन्ना लाल, अशोक और कुंजलाल ने बताया कि एक ओर कम पैदावार से आमदनी प्रभावित हुई है, वहीं दूसरी ओर चमगादड़ों के कारण पेड़ों पर तैयार हो रही फसल को भी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में उनके सामने फसल को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
उन्होंने बताया कि चमगादड़ों के हमलों के कारण सेब की फसल तैयार होने से पहले ही तुड़ान कर मंडियों में पहुंचाना पड़ रहा है। इससे सेब के दाम भी कम मिल रहे हैं और उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
चमगादड़ सेब को नुकसान पहुंचा रहे हैं इससे बागवानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। पहले ही फसल कम है और इसके बाद चमगादड़ भी नुकसान कर रहे हैं। -राजीव ठाकुर, सदस्य पतलीकूहल आढ़ती संघ
चमगादड़ों के आतंक से बागवानों को छुटकारा दिलाने के लिए सरकार और विभाग को उचित कदम उठाने की जरूरत है, ताकि बागवानों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। -रोशन ठाकुर, निवासी खखनाल बागवान
पहले ही सेब की कम फसल है लेकिन अब चमगादड़ ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में प्रदेश सरकार से आग्रह है कि प्रभावित बागवानों को मुआवजा दिलाया जाए। -प्रेम शर्मा, अध्यक्ष कुल्लू फलोत्पादक मंडल