सेब के बगीचों का निरीक्षण करती हुई विशेषज्ञों की टीम।
कुल्लू। जिला कुल्लू में सेब सीजन की शुरूआत हो चुकी है। अर्ली वैरायटी सेब मंडियों में पहुंच रहा है। नग्गर खंड और कुल्लू खंड के सेब बगीचों में पौधे माइट, पतझड़ रोग और अल्टरनेरिया ब्लाइट के कहर से बागवान परेशान हो गए हैं। सावन माह में ही सेब पौधों के पत्ते झड़ने लगे हैं।
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा के वैज्ञानिक भी बगीचों में पहुंच गए हैं और सेब के पौधों का निरीक्षण कर रहे हैं। वैज्ञानिकों की टीम ने माइट, पतझड़ रोग और अल्टरनेरिया ब्लाइट बीमारियों को देखते हुए कुल्लू जिला के नग्गर खंड के तहत आने वाले गांव अरछंडी, सरसेई, प्रीणी, बुरूआ, कुल्लू विकास खंड के तहत आने वाले बराधा, छिंजरा व बड़ोगी आदि का दौरा किया।
विशेषज्ञों के दौरान बारीकी से सेब पौधों का निरीक्षण किया गया और इनमें मुख्यत: नजर आने वाली बीमारियों को जाना। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने बागवानों से बातचीत की और उन्हें माइट, पतझड़ रोग और अल्टरनेरिया ब्लाइट रोग से अपने पौधों को बचाने के लिए जरूरी टिप्स दिए। गौर रहे कि असमय पतझड़ में सेब के पत्ते पीले होकर नीचे गिर जाते हैं। असमय पत्ते गिरने के साथ ही माइट और अल्टरनेरिया ब्लाइट रोग से सेब की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
डॉ यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा के वैज्ञानिक डॉ. विजय भारद्वाज ने कहा कि कुल्लू और नग्गर खंड के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर टीम ने दौरा किया है। इस दौरान बगीचों में माइट, पतझड़ रोग और अल्टरनेरिया ब्लाइट की बीमारी देखने को मिली है। जांच के लिए पत्तियों के नमूने भी लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बीमारियों पर नियंत्रण करने के लिए बागवानों को विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदित छिड़काव सारिणी का अनुसरण करने की सलाह दी गई है।