इस वर्ष बर्फबारी कम होने से जनजातीय क्षेत्र के किसान पहले की सूखे की चिंता से परेशान हैं, वहीं प्रदेश सरकार कृषि उपकरणों पर मिलने वाली सब्सिडी को करीब ढाई सालों से जारी नहीं कर रही है। देश में लाहौल स्पीति ही एकमात्र ऐसा जिला है जहां के किसानों की आर्थिकी महज खरीफ की फसलों पर टिकी है। विकट भूगौलिक पृष्ठभूमि के कारण यहां किसान पूरे साल में एक फसल को बीज पाते हैं।
लाहौल-स्पीति में आलू, मटर और सब्जियों के साथ पिछले कुछ सालों से किसानों का रूझान पुष्प उत्पादन की तरफ भी बढ़ा है। किसानों ने खेतीबाड़ी और बागवानी के लिए पॉवर टिलर, स्प्रे मशीन और शेड-नेट के लिए बैंकों से कर्ज ले रखे हैं। इन उपकरणों पर सरकार की ओर से 50 फीसदी अनुदान मिलना था। सेना में 17 साल देश सेवा के बाद कृषि से जुड़े चौखांग गांव के किसान लालचंद के अनुसार वह पांच सालों से पुष्प उत्पादन से जुड़े हैं।
उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर शेड-नेट, पॉवर टिलर और स्प्रे मशीनें खरीदी है, लेकिन सभी तरह के कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी उन्हें अभी तक अनुदान की राशि जारी नहीं हो सकी है। किसान प्रेम सिंह, नील चंद, रणवीर, रामचंद और वीर सिंह का कहना है कि उन्होंने दो साल पहले उधार के पैसों से पॉवर टिलर, स्प्रे पंप और अन्य उपकरण खरीदें हैं।
अब संबंधित विभाग से अनुदान राशि जारी नहीं हो पाने से अब उधार, चुकाना तक मुश्किल हो गया। जिला उद्यान अधिकारी केएल कटोच ने माना कि कुछ सालों से किसानों को दी जाने वाली अनुदान की राशि जारी नहीं हो सका है। अनुदान की करीब 56 लाख राशि की राशि पेंडिंग है।