वर्ष 2024-25 में 250 बागवानों ने लगाई एंटी हेलनेट, 2 करोड़ 41 लाख का अनुदान मिला
जिले में हर साल हो रहा है बागवानों को नुकसान, इससे बचने के लिए एंटी हेलनेट फायदेमंद
गौरीशंकर
कुल्लू। जिले में सेब की फसल को ओलावृष्टि से बचाने के लिए एंटी हेलनेट (ओला अवरोधक जाली) कारगर साबित हो रही है। जिन बागवानों ने अपने बगीचों में ओला अवरोधक जाली लगा रखी है, उनकी सेब की फसल को नुकसान न के बराबर हुआ है। जिन्होंने एंटी हेलनेट नहीं लगाई है, उन्हें साल दर साल नुकसान झेलना पड़ रहा है।
जिले में वर्ष 2024-25 में 250 बागवानों ने ओला अवरोधक जाली लगाई है। इसके लिए सरकार ने बागवानों को 2.41 करोड़ का अनुदान भी दिया है। वर्ष 2021 से 2023 तक विभाग ने 20 हजार 467 बागवानों को बगीचों में जाली लगाने के लिए 13 करोड़ 93 लाख 63 हजार का अनुदान दिया है।
बागवानी विशेषज्ञों की मानें तो जिस तरह पिछले कुछ वर्षों से हर साल ओलावृष्टि से बागवानों की फसलों को नुकसान पहुंंच रहा है, उससे बागवानों में ओला अवरोधक जाली लगाने में ज्यादा रुचि पैदा हो रही है। योजना के तहत आवेदन करने वाले बागवानों की संख्या अधिक बढ़ रही है। इसके चलते बागवान योजना के तहत सेब की फसल को ओलावृष्टि से बचाने के लिए सुरक्षा चक्र बांध रहे हैं।
फलों के अधीन क्षेत्रफल
जिले में अलग-अलग फलों के उत्पादन के अंतर्गत करीब 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र आता है। इसमें सेब के साथ, आड़ू, नाशपाती, अनार, जापानी फल, कीवी, अखरोट और बादाम आता है। सिर्फ सेब के बगान जिले में करीब 28 हजार हेक्टेयर भूमि क्षेत्रफल में फैले हैं।
पक्षियों से भी फलों का बचाव
जानकारों की मानें तो ओला अवरोधक जाली से सिर्फ ओलावृष्टि से ही सेब का बचाव नहीं होता, बल्कि इससे पक्षी भी फसलों को नुकान नहीं पहुंचा पाते हैं। बागवानों की मानें तो इससे सेब के अलावा जापानी और दूसरे फलों के पौधों में भी यह जाली लगाकर दूसरे फलों को भी बचाया जा रहा है।
जिले में ओला अवरोधक जाली बागवानों को फायदा पहुंचा रही है। इसके लिए विभाग के माध्यम से अनुदान दिया जा रहा है। ऐसे में वर्ष 2024-25 में विभाग ने 250 बागवानों को 2.41 करोड़ का अनुदान वितरित किया गया है। - उत्तम पराशर, उप निदेशक उद्यान विभाग जिला कुल्लू