भूस्खलन और बादल फटने से सड़कें बंद होने से रास्ते में फंसा बागवानों का सेब
जिले में कहीं पुल बहा तो कई बह गईं राहें, हर गुजरते दिन के साथ बढ़ता जा रहा डर
बागवानों ने रोका तुड़ान, टेढ़ी खीर साबित हो रहा फसल को मंडियों तक पहुंचाना
राजीव नैय्यर
कुल्लू। सेब इस बार वक्त पर पका लेकिन किस्मत फिर भी कच्ची रह गई। कुल्लू की लगघाटी में बादल फटने और भूस्खलन ने वे रास्ते बंद कर दिए हैं जिनसे होकर बागवान अपनी मेहनत की कमाई मंडियों तक पहुंचाते थे।
टूटी सड़कों, बहते पुलों और मलबे में फंसे ट्रकों के बीच बागवानों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल है- सेब तोड़ें या नहीं? फसल मंडी तक पहुंचाना जोखिम भरा जुआ बन गया है। हर गुजरते दिन के साथ नुकसान का डर और गहराता जा रहा है।
लगघाटी की मुख्य सड़क पर रूजग और तेलंग में वाहन योग्य पुल बादल फटने से बह गए हैं। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण भूमतीर, भल्याणी, कालंग, समाणां, माशणां, खणीपांद आदि क्षेत्रों में संपर्क सड़कें भी बंद हैं। इन सड़कों को री-स्टोर होने में समय लगेगा। ऐसे में घाटी की 13 पंचायतों के बागवानों के लिए सेब को मंडियों तक पहुंचाना आफत बन गया है। महाराजा घाटी की मुख्य कुल्लू-पीज सड़क भी अवरुद्ध है। दोघरी-समाणां सड़क धंस गई है। इस सड़क पर 20 से अधिक वाहन फंसे हैं। इन्हें ग्रामीणों ने शनिवार को तार स्पेन के सहारे निकाला।
घाटी में सेब सीजन चरम पर है लेकिन सड़कें और संपर्क मार्ग खस्ताहाल होने से बागवानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकतर बागवानों ने तुड़ान रोक दिया है। सड़कें और मार्ग सुरक्षित न होने से फसल मंडियों तक पहुंचाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बीसी नेगी ने कहा कि लगघाटी की सड़कों को री-स्टोर करने का काम जारी है।
19 अगस्त को चौपाड़सा पंचायत के साथ लगते भू-भू जोत में बादल फटा है। इससे स्थानीय लाेगों के साथ बागवानोें की दिक्कतें बढ़ी हैं। रूजग से आगे वाहन न आने से चार पंचायतों के हजारों ग्रामीण परेशान हैं। - रोशन लाल, निवासी फलाण
लगघाटी की मुख्य सड़क और संपर्क मार्ग बंद हैं। बादल फटने से पुल और भारी बारिश से जगह-जगह भूस्खलन हो रहा है। बागवानों के लिए सेब मंडियों तक पहुंचाना चुनौती से कम नहीं है। नुकसान होने की चिंता सताने लगी है। -यशवंत सिंह, उपप्रधान ग्राम पंचायत माशणां