फरवरी माह के दो सप्ताह बीत चुके हैं। वहीं अधिकतर सेब बगीचों वाले इलाकों में पर्याप्त रूप से बर्फबारी नहीं हुई है। हालांकि ऊंचे क्षत्रों में आंशिक रूप से तो हुई, बावजूद इसके अधिकतर बगीचों वाले क्षेत्रों में पर्याप्त हिमपात नहीं हुआ है। ऐसे में बगीचों में पर्याप्त नमी के अभाव के कारण कई बीमारियों के पनपने की आशंका पैदा हो रही है। उचित तरीके से तौलियों में खाद घुल नहीं पा रही है।
बागवानों के अनुसार समय पर बर्फबारी नहीं हुई तो कई कीट पतंगों के पनपने की आशंका और बढ़ गई है। अधिक गर्मी के चलते सेब और नाशपाती की फ्लावरिंग वक्त से पहले हो जाएंगी। ऐसे में बागवानों को आगामी सेब की फसल की चिंता सताने लगी है। गत साल दिसंबर माह में ही पर्याप्त बर्फ बारी हुई थी और वक्त पर चिलिंग आवर्स पूरे होने से सेब और अन्य फलों की चोखी फसल हुई थी। मगर इस साल बर्फ बारी तो दूर बारिश भी वक्त पर नहीं हो रही है। पर्यावरणविदों का मानना है कि इसका मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग है।
बर्फबारी का होना सेब की फसल के लिए अति आवश्यक है। बर्फबारी से सेब के पौधों में लगने वाली कई बीमारियां से निजात मिलती है। घाटी के बागवान अमित, राजेंद्र, चमन कमल, रोशन, नवीन और शेर सिंह आदि के अनुसार इस साल मौसम काफी शुष्क चल रहा है। इसके चलते बगीचों में मनमाफिक नमी नहीं है। खाद और गोबर भी सही तरीके से घुल नहीं रहा है। बागवानी विभाग के अनुसंधान केंद्र बजौरा के सह-निदेशक डॉ. जयंत कुमार का कहना है कि बर्फबारी का होना तमाम फलों और रबी की फसल के लिए अति आवश्यक है।