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भांग अफीम की जगह लगाए जाएंगे सेब के बाग

Wed, 20 Apr 2016 10:16 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, कुल्लू
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 इंस्टीट्यूट फॉर नारकोटिक्स स्टडीज एंड एनालिसिस (इंसा) द्वारा प्रदेश में मादक पदार्थों की समस्या सच्चाई व समाधान की तलाश विषय पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन बुधवार को संपन्न हुआ। सम्मेलन के दौरान नशे की समस्या व इसके समाधान पर व्यापक विचार-विमर्श  किया गया।
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समापन सत्र में एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक जेसी शर्मा ने इस समस्या के स्थायी समाधान की  संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने इसके लिए एचपीएमसी द्वारा शुरू की गई एक विशेष परियोजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में भांग व अफीम की अवैध खेती वाले इलाकों में एचपीएमसी लोगों को सेब की उन्नत किस्में लगाने के लिए प्रेरित करेगा। जेसी शर्मा ने  बताया कि इन इलाकों में सेब उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और एचपीएमसी विदेशों से ऐसी किस्में आयात कर रहा है जो आम किस्मों की तुलना में कई गुणा अधिक पैदावार देती है।

उपायुक्त हंसराज चैहान ने कहा कि नशीले पदार्थों की खेती रोकने और इसकी जगह वैकल्पिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में यह आयोजन मील पत्थर साबित हो सकता है। इस मौके पर इंसा के सचिव देवेंद्र कुमार, सदस्य ओपी शर्मा, जोगिंद्र सिंह ने बताया कि सम्मेलन के दौरान नशे की समस्या व इसके समाधान के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन मंथन किया गया। इस संबंध में इंसा हिमाचल प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी।
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सम्मेलन में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, पुलिस, एसएसबी, आईटीबीपी, कृषि, बागवानी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, सूचना एवं जनसंपर्क, राजस्व विभाग, राजस्व सतर्कता निदेशालय व अन्य विभागों के अधिकारियों के अलावा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने भी भाग लिया।

टीएचसी केमिकल को खत्म कर भांग पौधे की फसल कर्मिशयल बन सकती है। इससे मोबाइल बैटरी, कपड़ा, मेडिकल ऑयल समेत अन्य चीजें बनाई जा सकती है। यह दावा इंस्टीट्यूट फॉर नारकोटिक्स स्टडीज एंड एनालिसिस (इंसा) की तीन दिवसीय सम्मेलन में बाम्बे हैंप कंपनी के प्रतिनिधि जहान ने किया। कंपनी प्रतिनिधि का दावा है कि भांग पौधे में करीब 500 तरह के केमिकल पाए जाते हैं। इनमें टीएचसी केमिकल को खत्म कर इसे कर्मिशयल फसल के तौर पर उपयोग में लाया जा सकता है। इस संबंध में रिसर्च जारी है।
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