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Kullu News: आसमान से बरसी आफत में उजड़े सेब के बाग, मुआवजे की आस

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कुल्लू। जिले के कई इलाकों में हाल ही में हुई ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। खासकर सेब की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा है, जिससे बागवानों के चेहरे मायूसी से भर गए हैं। इस बीच फलोत्पादक मंडल बागवानों के साथ खड़ा हुआ है और नुकसान का पूरा ब्यौरा जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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फलोत्पादक मंडल ने जिलेभर के बागवानों और पंचायत स्तर पर अपने सदस्यों से ओलावृष्टि से हुए नुकसान की रिपोर्ट मांगी है। आंकड़ों के आधार पर मंडल सरकार के समक्ष मुआवजे की मांग रखेगा। इससे प्रभावित बागवानों में एक नई उम्मीद जगी है। दो दिन पहले ऊझी घाटी में फोजल से रायसन तक भारी ओलावृष्टि हुई थी।
इससे पहले भुंतर के निचले क्षेत्रों सैंज, बंजार और पार्वती घाटी के कई हिस्सों में भी ओले गिरे थे। नुकसान का पंचायत स्तर पर डाटा एकत्र कर जिलास्तर पर समेकित रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बागवान ओम चंद, सेस राम, केवलू राम और केहर सिंह का कहना है कि इस समय सेब की फसल सेटिंग के बाद मटर के दाने के आकार तक पहुंच चुकी है। ऐसे में ओलावृष्टि से फलों पर दाग लग रहे हैं, जो बाद में ठीक नहीं होते। दागी सेब की बाजार में मांग कम होती है। इसके बागवानों को उचित दाम नहीं मिल पाते। उन्होंने सरकार से नुकसान की भरपाई की मांग की है।
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ओलावृष्टि से कहां-कहां नुकसान हुआ है, हर एक पंचायत के कार्यकारिणी सदस्यों को कुल्लू फलोत्पादक मंडल माहिली में सूचित करने को कहा गया है। नुकसान की रिपोर्ट आने के बाद सरकार से सहायता की मांग की जाएगी, जिससे बागवानों की क्षतिपूर्ति हो सके।
-प्रेम शर्मा, फलोत्पादक मंडल अध्यक्ष, कुल्लू
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30 हजार हेक्टेयर में सेब की खेती
जिले में लगभग 30,000 हेक्टेयर भूमि पर सेब की खेती की जा रही है। सेब उत्पादन से हर साल करोड़ों का कारोबार होता है और जिले की करीब 80 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में बागवानी से जुड़ी हुई है। अधिकांश लोगों की आय का मुख्य स्रोत यही है।
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