ढालपुर में देवता आदिब्रह्मा के अस्थायी शिविर से उखाड़ी गई देवथड़ी का विवाद सुलझ गया है। अब न देवथड़ी उखाड़ी जाएगी और न ही यहां लगी जाली को हटाया जाएगा, बल्कि इसकी मरम्मत की जाएगी। यह फैसला जिला देवी-देवता कारदार संघ की कारकूनों और प्रशासन के साथ हुई बैठक में लिया गया है।
गौरतलब है कि यह विरोध चार दिन पहले खोखण कोठी आदिब्रह्मा के कारकूनों ने किया था, जब प्रशासन ने बिना देव नियम के देवथड़ी को उखाड़ने का कार्य छेड़ा था। इस दौरान हारियानों ने इस कार्य को रोक दिया था और पांच गढ़ हारियानों के साथ बैठक करने को कहा था। बुधवार को देवता के अस्थायी शिविर में ही देवी-देवता कारदार संघ की आदिब्रह्मा के कारकूनों और प्रशासन के साथ बैठक हुई। कारकूनों ने इस दौरान देवता के अस्थायी शिविर को बिल्कुल भी नुकसान न पहुंचाने और उखाड़ी गई देवथड़ी की मरम्मत करने की मांग की, जिस पर सहमति बन गई और मामला सुलझ गया। उल्लेखनीय है कि हारियान तो गर्मजोशी के साथ प्रशासन का विरोध करने आए थे, लेकिन जिला देवी-देवता कारदार संघ की ओर से समझाने के बाद मामला शांत हो गया। इधर, देवता आदिब्रह्मा विकास समिति के प्रधान जोगू राम और देवता के कारदार उत्तम का कहना है कि प्रशासन द्वारा बिना देवविधि से देवथड़ी को उखाड़ने पर हारियानों ने विरोध किया था।
उन्होंने बताया कि देवता का यह अस्थायी शिविर पहले जैसा ही रहेगा। इस मांग को मान लिया गया है। प्रशासन की ओर से तोड़ी गई थड़ी की मरम्मत और चारों ओर दीवार लगाने की मांग की है। इधर, जिला देवी-देवता कारदार संघ के जिलाध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने बताया कि देवथड़ियां लकड़ी की बनाई जा रही हैं। यह निर्णय जिला के तमाम देवी-देवताओं के कारदारों के साथ खंड स्तर से लेकर जिला स्तर तक हुई बैठक में लिया गया था। प्रशासन का यह सुझाव बिल्कुल सही है, इससे देवी-देवता राजस्व रिकॉर्ड में आएंगे।