कुल्लू दशहरा उत्सव के समापन में लंका दहन में पहुंची देवी हिडिंबा।-संवाद
कुल्लू। अठारह करड़ू की सौह एक बार फिर देव समागम की साक्षी बनी। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर से लंका पर चढ़ाई के लिए रथयात्रा निकाली गई। इस दौरान ढालपुर में चारों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हारियानों के कंधों पर सवार देवी-देवताओं की शोभायात्रा और रथयात्रा ने माहौल को देवमय बना दिया। श्रद्धालुओं में भगवान रघुनाथ के रथ के दर्शन करने और रस्सा खींचने को लेकर खासा उत्साह रहा।
भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर से पशु मैदान तक रथयात्रा के दोनों ओर हजारों श्रद्धालु जुटे। यात्रा शुरू होते ही जय श्रीराम के जयकारों से ढालपुर गूंज उठा। श्रद्धालु इस पल को मोबाइल फोन में कैद करने के लिए उत्सुक दिखे। भीड़ होने के कारण पुलिस को रथयात्रा के लिए रास्ता बनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
21 अक्तूबर को भगवान रघुनाथ की रथयात्रा रथ मैदान से शुरू होकर अस्थायी शिविर तक पहुंची थी। इसके बाद देवी-देवता अपने-अपने शिविरों में विराजमान हो गए थे। उत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को भगवान रघुनाथ के रथ को अस्थायी शिविर से खींचकर पशु मैदान तक ले जाया गया, जहां लंका पर चढ़ाई की परंपरा निभाई गई। इसके बाद श्रद्धालु रथ को वापस रथ मैदान तक लाए। भगवान रघुनाथ पालकी में सवार होकर सुल्तानपुर के लिए रवाना हुए। उनके साथ बिजली महादेव सहित अन्य देवी-देवताओं ने भी अपने देवालयों की ओर प्रस्थान किया। संवाद