कस्बे में तीन सौ से अधिक अवैध कब्जे हुए हैं चिह्नित, कई कब्जाधारकों का कोई अता-पता नहीं
वन विभाग ने वापस भेजी अवैध कब्जाधारियों की सूची
गौरीशंकर
कुल्लू। भुंतर कस्बे में अवैध कब्जों की फिर से सूची तैयार की जा रही है। राजस्व विभाग ने हालांकि तीन-चार माह पहले क्षेत्र में अवैध कब्जाधारकों की पहचान करने के लिए खोखन नाला क्षेत्र में डिमार्केशन की थी और इसकी सूची तैयार की थी, लेकिन इस सूची में कई ऐसे अवैध कब्जे भी हैं जिनमें कब्जा करने वालों का कोई अता-पता नहीं है।
प्रशासन ने इसकी सूची वन विभाग को भी सौंपी थी लेकिन अब वन विभाग ने इस सूची को वापस भेजा है ताकि अवैध कब्जाधारियों के नाम पते अंकित कर इसकी अंतिम सूची तैयार की जा सके। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कस्बे में 300 से अधिक अवैध कब्जे हैं जिसमें मकान, दुकानें सहित अन्य निर्माण किया गया है। क्षेत्र में अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए हालांकि बार-बार सूची बनाने का कार्य वर्षों से चल रहा है लेकिन कार्रवाई के नाम पर अभी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। लिहाजा, एक बार फिर सूची बनाने का काम किया जा रहा है।
खोखन नाला में में सबसे अधिक कब्जा
तीन महीने पहले खोखन नाला में प्रशासन और राजस्व विभाग ने डिमार्केशन की थी। इसमें भी 70 से अधिक अवैध कब्जे पाए गए थे। इन अवैध कब्जों में नगर पंचायत भुंतर का नाम भी शामिल था और वर्षाें से नगर पंचायत अवैध तौर पर बनी दुकानों से किराया भी ले रही है। यहां अधिकतर निर्माण खोखन नाले पर हुआ है जिस कारण नाले को बहने के लिए जगह नहीं बच पाई है, इस कारण पिछली बार बरसात में नाले का पानी और मलबा बाजार में आ गया था।
सूची बनती गई निर्माण होता गया
आलम यह है कि भुंतर कस्बे में दशकों से अवैध कब्जा और निर्माण का दौर जारी है लेकिन शासन और प्रशासन सूची पर सूची बनाता गया और अवैध कब्जे लगातार बढ़ते गए। यहां दशक पहले जहां सौ के करीब अवैध कब्जे थे, आज यह आंकड़ा 300 पार कर गया है।
बाक्स,
अवैध कब्जों की सूची में कई अवैध कब्जाधारियों के नाम पता नहीं है। विभाग ने राजस्व विभाग को सूची वापस भेजी है ताकि इनके नाम पते के साथ अंतिम सूची तैयार की जा सके और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा सके।
प्रवीण ठाकुर, वन मंडलाधिकारी, पार्वती वन मंडल