खराहल (कुल्लू)। शहद की मिठास अब कई घरों को मीठा करेगी। अनुसंधान केंद्र सेऊबाग बेरोजगारों को मधुमक्खी पालन में दक्ष करेगा। केंद्र के सौजन्य से पांच दिवसीय शिविर शुरू हो चुका है। यह सोलह मार्च तक चलेगा।
आधुनिक मौन गृह और मधुमक्खी पालन के लिए नाबार्ड के तहत 2009 में
परियोजना शुरू हुई थी। पहले चरण में चार लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस साल 9 लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। डा. वाईएस परमार औद्योगिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के तहत अनुसंधान केंद्र सेऊबाग में बेरोजगारों को मधुमक्खी पालन में पूरी तरह दक्ष किया जाएगा। योजना के तहत तेरह जून तक जिला भर में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलेंगे। वैज्ञानिकों के मुताबिक मधुमक्खी पालन रोजगार का अच्छा जरिया बन सकता है। बाजार में एक लीटर शहद की कीमत ढाई सौ रुपये तक है। फलदार घाटी कुल्लू शहद उत्पादन के लिए काफी अच्छी है। लिहाजा युवाओं को मधुमक्खी पालन में आगे आना चाहिए। बागवानी विवि नौणी के कीट विज्ञान के मुख्य प्रभारी डा. जेपी शर्मा युवाओं को इसमें दक्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौन गृह देशी मधु मक्खियों को सुरक्षित रखने में कामयाब हुए हैं। मिट्टी से बने मौन गृह में मधु मक्खियां लकड़ी के बने बक्से की अपेक्षा ज्यादा सुरक्षित रहती हैं। प्रशिक्षणार्थियों को एक आधुनिक मौन गृह और मधु मक्खियां भी दी जा रही हैं। शिविर के दौरान ढाई सौ लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। कटराईं, जगतसूख, कुल्लू, भुंतर, लगवैली, खराहल वैली, भाटग्रां, बड़ाग्रंा और बंजार में लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अनुसंधान केंद्र सेऊबाग के प्रभारी डा. भाटिया ने बताया कि शिविर में 34 युवाओं ने भाग लिया। इस मौके पर अरुण कुमार, मेहर चंद, बलवंत, महिंद्र और विवेक भी मौजूद रहे।