कुल्लू। देवभूमि कुल्लू हिमाचल का दूसरा सबसे बड़ा सेब उत्पादक जिला है। फलों की घाटी से मशहूर कुल्लू से इस बार 50 लाख सेब पेटियां देश की विभिन्न सब्जी मंडियों में पहुंची हैं। सेब सीजन सिमटे हुए दो हफ्ते का समय बीत गया है और अब बागवान अपने बगीचों में जरूरी कार्य में जुट गए हैं। कुल्लू घाटी में इस साल गत वर्ष की अपेक्षा ढाई गुणा अधिक सेब का उत्पादन हुआ है। बेहतर सेब उत्पादन से उत्पादकों को इसका भाव भी अच्छा मिला है। शुरूआती दौर में 3000 रुपये से अधिक रेट में सेब पेटी एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी दिल्ली में बिकी है।
इस सेब सीजन में जिला कुल्लू के सेब उत्पादकों की बल्ले-बल्ले हो गई है। पिछले साल कुल्लू घाटी में 40 हजार मिट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ था, लेकिन इस बार यह आंकड़ा ढाई गुणा अधिक होकर एक लाख मिट्रिक टन पहुंच गया है। इस तरह से जिले में सेब से करीब 550 करोड़ रुपये की आय हुई है।
बागवानों तेज राम ठाकुर, कमल ठाकुर, लाल चंद, खेमराज तथा राजू राठौर का कहना है कि उनके यहां सेब सीजन सिमटे हुए माह से भी अधिक समय गुजर गया है। सेब की अच्छी फसल का उन्हें बेहतर रेट मिला है। भले ही सेब का आकार उतना विकसित नहीं हो पाया था। बावजूद इसके वे पूरी तरह से संतुष्ट हैं।
कुल्लू-लाहौल विपणन बोर्ड के डा. सचिव शेर सिंह ठाकुर ने कहा कि सेब सीजन खत्म हो चुका है। जिला कुल्लू से 50 लाख सेब पेटियां देश की विभिन्न सब्जी मंडियों के लिए भेजी गई। पैदावार के साथ बागवानों को उचित दाम मिला है। शेर सिंह ने कहा कि इस साल जिले के आनी, बंजार तथा मणिकर्ण आदि इलाकों में ओलावृष्टि के चलते सेब उत्पादन प्रभावित हुआ है। बावजूद इसके घाटी के बागवानों को करीब 550-600 करोड़ की आय हुई है।