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देश में नहीं तो हिमाचल में क्यों टीईटी ?

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कुल्लू। नियुक्ति नहीं होने पर रोष स्वरूप क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे जेबीटी बैच 2008-10 के प्रशिक्षुओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि जल्द उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे आमरण अनशन पर बैठने के लिए मजबूर हो जाएंगे। जेबीटी बेरोजगार शिक्षकों ने सरकार से सवाल किया है कि जब देश में कहीं भी टीईटी की शर्त नहीं है तो उन पर ये नियम क्यों थोपा जा रहा है।
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कुल्लू में क्रमिक अनशन सातवें दिन में प्रवेश कर गया है। प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग उनकी कोई सुध नहीं ले रहा। संघ का कहना है कि सरकार जेबीटी प्रशिक्षुओं के साथ दोहरे मापदंड अपना रही है। इसी बैच के पांच प्रशिक्षुओं को बिना टीईटी के दिसंबर में नियुक्ति दी गई। कला अध्यापकों और भाषा अध्यापकों को सरकार ने बिना टीईटी के फरवरी में नियुक्ति दी। अब उन पर यह नियम थोपा जा रहा है। हकीकत यह है कि गुजरात, बिहार, हरियाणा, पंजाब में बिना टीईटी के नियुक्तियां दी गई हैं। जब देश में कहीं भी यह नियम नहीं है तो हिमाचल में किस आधार पर इस नियम को उन पर थोपा जा रहा है। प्रदेश महासचिव एवं प्रधान कुल्लू इकाई नरेश कुमार, प्रेस सचिव प्रवीण ठाकुर, मुख्य सलाहकार रूप सिंह, महासचिव पूर्ण सिंह, सलाहकार मदन लाल, नीलम, अनीता, नेहा, अनुकृति, अंजू, रीना, मंजु, विजेंद्र, ओम प्रकाश, ठाकुर दास, महेंद्र सिंह, गोपी, संदेश, दीपा, सूरज, लेस राम, लीना, विजय, शेर सिंह, बालकृष्ण, ममता, हीरा लाल, राकेश बोध, संदीप, कुलदीप, ऋषि, प्रेमपाल आदि ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई तो वे आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। शिक्षा मंत्री यह बयान देकर सहानुभूति जता रहे हैं कि हाईकोर्ट ने आरटीई के अंतर्गत टीईटी करवाने के आदेश दिए हैं। उनका यह बयान बिल्कुल बेबुनियाद है। न्यायालय का ऐसा कोई निर्णय नहीं है जिसमें टीईटी की बात की गई हो।
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