एससी-एसटी एक्ट को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन
भारत बंद का कुल्लू जिला में रहा मिलाजुला असर
ढालपुर में जनसभा के दौरान केंद्र के खिलाफ गरजे नेता
बोले, कोर्ट के आदेश से दलितों के अधिकारों का हनन
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट की ओर से लिए गए निर्णय के विरोध में सोमवार को भारत बंद का कुल्लू में मिलाजुला असर देखने को मिला। कुल्लू में अनुसूचित जाति कल्याण संघ सहित विभिन्न अनुसूचित जाति के संगठनों ने संयुक्त रूप से ढालपुर मैदान में जनसभा की। इस दौरान सरकार के खिलाफ रोष जताया गया। इसके बाद ढालपुर में रैली निकाली गई। उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भी सौंपा गया।
रैली को संबोधित करते हुए अनुसूचित जाति कल्याण संघ के अध्यक्ष दिले राम ने कहा कि लोगों को यहां आने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने मजबूर किया है। जो अधिकार दलितों को भीमराव अंबेडकर ने आजादी के बाद दिलाए थे, उनके साथ आज तक कोई छेड़छाड़ पिछली सरकारों ने नहीं की, लेकिन एक्ट्रोसिटी एक्ट में आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाकर दलितों के अधिकारों का हनन हुआ है। वहीं कोली समाज संगठन कुल्लू के अध्यक्ष अमर शलाठ ने कहा कि ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करे। याचिका दायर कर कानून की यथास्थिति को बनाए रखे।
उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर 14 अप्रैल तक सरकार ने इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। वहीं कुल्लू, मनाली, भुंतर, बंजार और सैंज में भी बाजार बंद नहीं रहा। दुकानें रोजाना की तरह खुली रही। हालांकि भारत बंद को लेकर दिनभर चर्चाओं का माहौल बना रहा। इस दौरान दलित साहित्य अकादमी के अध्यक्ष नीरत राम राखा, शैडो संस्था के अध्यक्ष हरदयाल भारती, सेवानिवृत्त सहायक अभियंता सेसराम आजाद, हेमंतदास पंथी, करतार कौशल, अंबेडकर परिषद अध्यक्ष रामलाल कुल्लवी, झाबेे राम कौशल, बुद्धि सिंह, राजकुमार, पुने राम, लोत राम, तारा चंद, गुमान चंद, सतीश कुमार, मोहर सिंह, तुले राम, ध्यान, भोला राम, सीता राम, टिकम राम और लाल चंद आदि मौजूद रहे।