केलांग (लाहौल-स्पीति)। घाटी में 1967 से अब तक हुए 11 विधानसभा चुनावों में लाहौल-स्पीति से कांग्रेस प्रत्याशियों का दबदबा रहा है। हालांकि 2003 के चुनाव में डॉ रामलाल मार्कंडेय ने कांग्रेस गढ़ में सेंध लगाकर पहली बार लाहौल स्पीति में कमल खिलाया।
पूर्व वन मंत्री रहे ठाकुर देवी सिंह यहां से सबसे अधिक चार बार चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं। आजादी के बाद लाहौल-स्पीति में हुए पहले विधानसभा चुनाव में किसी राजनीतिक दल के नहीं बल्कि आजाद प्रत्याशी लड़े ठाकुर देवी सिंह ने चुनाव जीत अपना परचम लहराया। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी निहाल चंद को शिकस्त दी। 1972 में देवी सिंह कांग्रेस की लता ठाकुर से चुनाव हार गए। चुनाव जीत कर लता ठाकुर हिमाचल की पहली महिला विधायक बनी। 1977 में ठाकुर देवी सिंह ने जेएनपी की टिकट से चुनाव जीता। 1982 के चुनाव में कांग्रेस ने ठाकुर देवी सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया ओर भाजपा ने पहली बार सुरेंद्र चंद को अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा और यह चुनाव देवी सिंह ठाकुर जीत गए। 1985 में देवी सिंह ने लगातार दूसरी बार चुनाव जीत का सबसे अधिक वोट लेने का रिकॉर्ड दर्ज किया।
इस चुनाव में उन्हें 8646 वोट पड़े जबकि भाजपा के शिव चंद ठाकुर को महज 331 वोट पड़े। 1990 और 1993 के दोनों चुनाव में कांग्रेस के फुंचोग राय ने जीत का परचम लहराया। 1993 में प्रदेश में सरकार बनने के बाद हुए चुनाव में भी भाजपा जीत नहीं पाई। 1998 में भाजपा-हिविकां प्रत्याशी डॉ राम लाल मार्कंडेय ने जीत दर्ज की। 2003 में कांग्रेस के ठाकुर रघुवीर सिंह और 2007 में भाजपा के मार्कंडेय ने चुनाव जीता। 2012 का चुनाव रवि ठाकुर ने जीता जिसे कांग्रेस ने फिर मैदान में उतारा है। 2017 विधानसभा चुनाव में रवि ठाकुर और डॉ मार्कंडेय एक बार फिर आमने-सामने हैं।