फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सूखे से निपटने के लिए प्रशासन की योजना फेल

विज्ञापन
विज्ञापन
सूखे से निपटने के लिए
विज्ञापन

प्रशासन की योजना फेल
खराहल घाटी में दिक्कतों के कारण नहीं लग पाएंगे हैंडपंप
पेयजल संकट दूर करने को जिला में लगने थे 25 हैंडपंप
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला में दो माह से सूखे के कारण दर्जनों पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। पेयजल संकट को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने बैठक करके टैंकर से आपूर्ति, 25 नए हैंडपंप निकाल कर लोगों को पेयजल आपूर्ति सुचारु रखने की हामी भरी। बावजूद इसके अभी तक सूखे से निपटने की प्रशासन की योजना फेल होती नजर आ रही है। फिजिवलिटी न होने के चलते कई क्षेत्रों में हैंडपंप नहीं निकाले जा सकेंगे। खासकर सूखाग्रस्त क्षेत्र के लोगों को फिलहाल राहत नहीं मिलेगी।
आईपीएच विभाग ने कुल 25 हैंडपंपों में पांच हैंडपंप खराहल घाटी में लगाने थे। लेकिन फिजिविल्टी न होने के चलते यह हैंडपंप यहां पर नहीं लगाए जा रहे हैं। पानी का लेवल, ड्राई एरिया आदि कई बिंदुओं को ध्यान में इन हैंडपंपों को खराहल में नहीं निकाला जाएगा। हालांकि आईपीएच विभाग ने खराहल घाटी के दूसरे छोर सेउबाग के इसके साथ लगते स्थान पर दो हैंडपंप निकाल दिए हैं। हैंडपंपों के लगने के बाद ग्रामीणों ने भी राहत महसूस की है।
विज्ञापन

इस संबंध में घाटीवासी रमेश कुमार, मानचंद ठाकुर, बॉबी, अंशु शर्मा, नितिन प्रकाश और पौशू राम के अनुसार पेयजल योजनाओं में पानी की कमी के बाद अब एकमात्र सहारा हैंडपंप और प्राकृतिक जलस्रोत ही हैं। सूखे के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में आईपीएच विभाग के सहायक अभियंता हरि प्रकाश भारद्वाज के अनुसार सूखे के दौरान लोगों को पेयजल मुहैया करवाने के लिए जिले में 25 में से दो हैंडपंप निकाले जा चुके हैं। पांच हैंडपंप सूखाग्रस्त खराहल में निकाले जाने थे लेकिन फिजिविल्टी न होने के चलते निकाले नहीं जा रहे हैं। पेयजल से खेतों की सिंचाई करने वालों पर विभाग की नजर है। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विज्ञापन


तीसरे दिन मिल रहा है पानी
खराहल घाटी में रोटेशन के तहत हर तीसरे दिन ग्रामीणों को पेयजल मुहैया करवाया जा रहा है। ऐसे में हैंडपंप नहीं लगने से पेयजल संकट की स्थिति बरकरार है। प्रशासन की योजना भी खराहल घाटी में फेल हो गई है। अब टैंकर के माध्यम से ही पेयजल संकट दूर किया जा सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें