अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार बारिश और धुंध से लाल रसीला सेब काला पड़ने लगा है। अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में यह समस्या बागवानों के बगीचों में पेश आ रही है। सूटी ब्लॉच और फ्लाई स्पैक बीमारी की जकड़ के कारण लाल रसीला सेब अपना वास्तविक रंग बदलने लगा है। ऐसे में बागवान अपनी फसल के प्रति चिंतित नजर आ रहे हैं। साथ ही कालेपन से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 15 फीसदी फसल प्रभावित हो चुकी है।
बगीचों में नमी की मात्रा अधिक बढ़ गई है। रोज पड़ रही धुंध भी सेब की फसल पर असर डाल रही है। ऐसे में जिले के बागवान बगीचों में बची हुई फसल के प्रति चिंतित हैं। घाटी के बागवान अमित, चमन, राज, चुनी लाल, शेर सिंह ठाकुर, अभिषेक, राजेंद्र, कमल, खेम चंद, धर्म सिंह, टेक सिंह ने कहा है कि अधिक बारिश भी अब ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए मुसीबत बन गई है। धुंध और लगातार बारिश के चलते सेब का दाना काला पड़ने लगा है। दाने पर काले बिंदु उभर आए हैं। ऐसे में सेब ए ग्रेड का न रहकर बी ग्रेड का होने लगा है। मजबूरी में बागवानों को बेचने के लिए इसे साफ करना पड़ रहा है। गीले कपड़े से साफ करने के बाद इसकी चमक समाप्त हो रही है। इसके प्रभाव से मंडियों में सेब बी ग्रेड के दाम में बिक रहा है। काला पड़ने से फसल को नुकसान हो रहा है।
इस तरह करें कालेपन की रोकथाम
बागवानी विभाग के उप निदेशक डॉ. आरके शर्मा ने कहा कि सेब के कालेपन से निजात के लिए बागवान समय-समय पर शेड्यूल के मुताबिक दवाइयों का छिड़काव करें। बागवान 600 ग्राम कैपटान या जीरम 600 मिली दो सौ लीटर पानी में घोल मिलाकर छिड़काव करें। इससे बीमारी की रोकथाम हो जाएगी। कहा कि अधिक जानकारी के लिए बागवान अपने ब्लॉक के प्रसार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।