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कुल्लू में 23 बच्चे कुपोषण का शिकार

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुल्लू। समेकित बाल विकास परियोजना के तहत जिला के आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पौष्टिक आहार भी दिया जा रहा है। बावजूद इसके बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों पर आधारित जुलाई माह में विकास प्रबोधन की समीक्षा में यह पाया गया है कि जिला में 1016 बच्चों को आंशिक रूप से कुपोषित हैं। 23 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं। कुपोषित बच्चों में 17 बच्चे बाल विकास परियोजना कुल्लू तथा 6 बच्चे बाल विकास परियोजना कटराईं के हैं।
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विभाग ने कुपोषित बच्चों को लेकर बीएमओ को जानकारी दी है। इसके बाद इन बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। विभाग ने प्रतिमाह की जाने वाली समीक्षा के आधार पर शून्य से पांच साल तक के 30135 बच्चों का वजन किया। जिसमें आनी के 3328, बंजार के 5126, कटराईं के 7707, कुल्लू के 10148 और नित्थर के 3826 बच्चे शामिल थे। इनमें से 29705 बच्चों को स्वस्थ यानी हरे जोन में पाया गया। कुल 30135 बच्चों में 1016 बच्चों को आंशिक रूप से कुपेाषित पाया गया। पीले जोन वाले बच्चों की संख्या आनी में 3, बंजार में 255, कटराईं में 233, कुल्लू में 433, नित्थर में 92 है। इसके अलावा गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे सिर्फ कटराईं और कुल्लू में ही पाए गए। कुल्लू के 17 और कटराईं के 6 बच्चे ओरेंज जोन में पाए गए। जिला कार्यक्रम अधिकारी विरेंद्र सिंह आर्य ने कहा कि 23 बच्चों को गंभीर रूप से कुपोषित तथा 1016 बच्चों को आंशिक रूप से कुपोषित पाया गया है। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को लेकर बीएमओ को लिखा गया है। बच्चों के स्वास्थ्य को जांचने को प्रतिमाह रिपोर्ट ली जाती है।
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