कुल्लू। राजकीय महाविद्यालय कुल्लू में देशभर के 55 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से 53 शोधों का वाचन किया। महाविद्यालय में मंगलवार को पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र जैव विविधता केंद्रीय विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ।
मंगलवार को जैव विविधता और पारिस्थितिक तंत्र सेवा विषय में एनईईआरआई नागपुर की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शालिनी ध्यानी, बीजीएसबी विश्वविद्यालय राजौरी (जम्मू-कश्मीर) के सहायक प्रो. डॉ. श्रीकर पंत और कुमायूं विश्वविद्यालय नैनीताल के प्रो. आशीष तिवारी ने विचार व्यक्त किए।
दूसरा सत्र जैव विविधता में स्वदेशी ज्ञान पर केंद्रित रहा, जिसमें आरसीएफसी जोगिंद्रनगर के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अरुण चंदन, राजकीय महाविद्यालय मंडी की डॉ. तारा और कृषि विज्ञान केंद्र बजौरा की डॉ. चंद्रकांता ने व्याख्यान दिया। तीसरे सत्र में एचएफआरआई शिमला के वैज्ञानिक डॉ. विनीत जिस्टा ने कृषि एवं वन में जैव विविधता विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। चौथा सत्र जैव विविधता में नवाचार पर केंद्रित रहा। इस दौरान रीजनल सेंटर फॉर बायो टेक्नोलॉजी नई दिल्ली के सहायक प्रो. डॉ. प्रेम सिंह कौशल और सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के सहायक प्रो. डॉ. हितेश कुमार ने अपने विचारों से अवगत करवाया।
स्थानीय विद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनदीप शर्मा ने बताया कि दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में छह सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें 53 शोध पत्रों का वाचन हुआ। इस दौरान हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. एसएस सामंत, डॉ. बृजबाला, प्रो. सोम किशन, प्रो. जय प्रकाश, डॉ. मान सिंह, प्रो. राजेश, डॉ. आशीष, डॉ. शुभम दीप, डॉ. अश्वनी, डॉ. सुनील, डॉ. संतोष ठाकुर, प्रो. पूजा सोहल, प्रो. रवि, प्रो. नंदिनी आदि उपस्थित रहे। संवाद