कुल्लू। देवी-देवताओं की धरती कुल्लू में रविवार को जिला के अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ के सम्मान में बंसत पचंमी पर्व धूमधाम से मनाया गया। अठारह करडू की सौह कहे जाने वाले ढालपुर के ऐतिहासिक मैदान में बसंत पंचमी पर सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर राम-भरत मिलन की परंपरा को भी निभाया गया। राम भरत मिलन देख कई श्रद्धालु भावुक हो उठे। इस दौरान आराध्य भगवान रघुनाथ लाव लश्कर के साथ अपने अस्थायी शिविर में पहुंचे। रथ को खींचने के लिए सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। रथ को खींचकर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पुण्य कमाया। रघुनाथ भगवान का शहरवासियों ने जगह-जगह पर फूलों के साथ स्वागत किया। शहर की गलियां सिया-राम के जयकारों से गूंज उठीं। ढालपुर के रथ मैदान पहुंचते ही यहां पर भगवान रघुनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई। पूजा-अर्चना के बाद राम भक्त हनुमान अपने प्रभु से मिलने पहुंचे। इसके बाद भव्य रथयात्रा शुरू हुई। रथयात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। थोड़ी देर बाद अचानक भगवान रघुनाथ का रथ रुक गया। यहां पर राम भरत-मिलन की परंपरा को निर्वहन किया गया। राम-भरत मिलन को देखकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई। वहीं, रथ को खींचने के लिए युवाओं में खासा जोश नजर आया। अस्थायी शिविर में पहुंचने के बाद भी भगवान रघुनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई। शिविर में भजन कीर्तन का भी दौर चलता रहा। वैरागी समुदाय के लोगों ने भगवान रघुनाथ के चरणों में गुलाल अर्पित कर होली के गीत गाए। इसके साथ ही वैरागी समुदाय के लोगों की होली का आगाज भी हो गया। अस्थायी शिविर में आए भगवान रघुनाथ के दर्शनों के लिए लोगों का तांता लगा रहा। करीब साढ़े तीन बजे परंपराओं का निर्वहन करने के पश्चात भगवान रघुनाथ अपने लाव-लश्कर के साथ सुल्तानपुर के लिए निकल पड़े। बसंत पंचमी को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। पर्व में आए विदेशी मेहमानों ने भी इस सुंदर नजारे को अपने कैमरों में कैद किया। वहीं, सेल्फी खींचने को लेकर युवाओं में होड़ रही।
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गुलाल न फेंकने की अपील के बनाए थे बोर्ड
बंसत पंचमी में होली के रंगों के बढ़ते प्रचलन को रोकने के लिए इस बार राम सेवकों की ओर से विशेष बोर्ड तैयार किए गए थे। जिसमें लोगों से गुलाल न फेंके जाने की अपील लिखी गई थी। पिछले दो तीन वर्षों में बंसत पंचमी पर होली का नजारा देखने को मिला था। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ है। होली का गुलाल फेंकने की पंरपरा का निर्वहन केवल भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने ही किया।
बलदेव