केलांग (लाहौल-स्पीति)। जिले में करीब छह दशक बाद सितंबर महीने में हुई भारी बर्फबारी ने हजारों लोगों की जिंदगी मुश्किल में डाल दी है। घाटी में सेब के बगीचों को तबाह कर दिया है। मौसम खुलने के बाद बर्फ के बीच जिंदगी के लिए जद्दोजहद कर रहे हजारों सैलानियों और मजदूरों को बचाने के लिए राज्य सरकार ने सेना के तीन हेलीकॉप्टरों को रेस्क्यू ऑपरेशन में लगा दिया है। बर्फबारी ने सेब के लाखों पेड़ नष्ट कर दिए हैं।
लाहौल घाटी में पिछले एक दो सालों से उत्तम क्वालिटी के सेब की पैदावार शुरू हुई थी। लेकिन कुदरत ने एक झटके में बागवानों के उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। लाहौल घाटी आलू के बाद अब उत्तम क्वालिटी के सेब उत्पादन के लिए देशभर में अलग पहचान बनाने लगी थी। 15-20 साल की कड़ी मेहनत के बाद घाटी में अभी सेब उत्पादन शुरू हुआ था। प्रथम आकलन के मुताबिक बर्फबारी ने सेब से लदे करीब दो लाख पेड़ों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। इससे बागवानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। अक्तूबर महीने में सेब तुड़ान शुरू होना था। अधिकतर बागवानों का व्यापारियों से सौदा भी तय हो चुका था। गौशाल गांव के बागवान रोहित, दिनेश, कुलजीत, रमेश, अमर और राकेश ने बताया कि बर्फ के वजन से सेब के पेड़ धराशाही हो गए हैं। अब बगीचों में नए सिरे से सेब के पौधे लगाने होंगे। बागवानों को सेब की फसल के लिए अब फिर 15 से 20 साल का इंतजार करना होगा। पट्टन घाटी के किसान रामपाल, अनिल, सुनील व सुरेश ने बताया कि बेहतर क्वालिटी के कारण देशभर के व्यापारी सेब खरीदने लाहौल पहुंच रहे थे। लेकिन बेमौसम बर्फबारी ने घाटी में सेब कारोबार को झटके में तबाह कर दिया है। बागवानी महकमे के रिकॉर्ड के मुताबिक लाहौल में करीब चार हजार हेक्टेयर भूमि पर सेब के बगीचों में करीब चार लाख से अधिक सेब के पौधे लगाए हैं। बर्फबारी के कारण पेड़ नष्ट होने से करोड़ों का नुकसान हुआ है। कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि राज्य सरकार बर्फबारी से तबाह हुए सेब के पेड़ों के नुकसान का जायजा लेगी। जनजातीय बागवानों की एक-एक पेड़ के नुकसान की भरपाई की जाएगी। इस मुश्किल घड़ी में वे घाटी के किसानों के साथ हैं।
प्रयोगशाला में लाहौल घाटी में उगने वाले सेब की गुणवत्ता देशभर में सबसे बेहतर आंकी गई है। लहौली सेब में अन्य सेबों की तुलना में अधिक रस पाया गया है, जबकि छिलका मोटा होने के कारण लहौली सेब लंबे समय तक खराब नहीं होता।
-डॉ. सोनम, जिला बागवानी उपनिदेशक